अजमेर

राजस्थान: बुजुर्ग से ₹4.39 लाख की ठगी मामले में फर्जी डॉक्टर समेत 3 आरोपी भोपाल से गिरफ्तार

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अजमेर। शहर में यूनानी थेरेपी के नाम पर बुजुर्ग से लाखों रुपए की ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। स्थानीय जिला पुलिस ने फर्जी डॉक्टर्स समेत तीन आरोपियों को मध्यप्रदेश के भोपाल से गिरफ्तार किया है। ये आरोपी 73 बार मवाद निकालने के नाम पर करीब 4.39 लाख रुपए की ठगी कर चुके हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकदी, चिकित्सा उपकरण, मोबाइल फोन और घटनास्थल में इस्तेमाल हुई कार जब्त कर ली है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह ने बुजुर्ग को यूनानी थेरेपी के बहाने बार-बार घर पर इलाज का झांसा दिया और इसके बदले भारी रकम वसूली। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में इलाज के लिए राशि दी, लेकिन बाद में आरोपियों ने दवाइयों और सर्जरी के नाम पर लगातार अधिक पैसे मांगने शुरू कर दिए। 73 मवाद निकालने की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने कुल 4.39 लाख रुपए आतंक लिया।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी फर्जी डॉक्टरों के रूप में स्थानीय लोगों को ठगने का काम कर रहे थे। उन्होंने नकली मेडिकल उपकरणों का भी इस्तेमाल किया ताकि मरीजों को वास्तविकता का पता न चले। इससे पहले भी कई लोग इस गिरोह की ठगी के शिकार हो चुके हैं, जिनसे पुलिस गहन पूछताछ कर रही है।

अधीक्षक ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और अन्य संभावित सदस्यों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और एक साथ कई ठगी के मामलों के खुलासे की उम्मीद है।

स्थानीय प्रशासन ने इस मामले पर चेतावनी जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वे केवल प्रमाणित और भरोसेमंद चिकित्सकों से ही इलाज करवाएं तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

यह मामला एक बार फिर से दर्शाता है कि बुजुर्गों और मरीजों की भावनाओं का गलत फायदा उठाने वाले व्यक्ति किस तरह से उन्हें ठगते हैं। पुलिस और प्रशासन मिलकर ऐसे गिरोहों पर कड़ी नजर बनाए रखने की बात कह रहे हैं ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।

उच्च न्यायालय और राज्य सरकार से भी आग्रह किया जा रहा है कि वे चिकित्सा पेशे में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं तथा ऐसे दुर्भावनापूर्ण गिरोहों को दंडित कर सही चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करें।

इस प्रकार, अजमेर पुलिस की इस सफलता से चिकित्सा सुरक्षा में सुधार की उम्मीद जगती है और लोगों को सतर्क रहने एवं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता महसूस कराई गई है।

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