भरतपुर के किसानों की फसलों को बड़ा नुकसान: गेहूं, सरसों और चने की फसलें तबाह, मुआवजे की उठी मांग
भरतपुर, राजस्थान। वर्ष 2024 के इस कृषि मौसम में भरतपुर जिले के किसानों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक के बाद एक प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनियमितताओं के कारण जिले की मुख्य फसलें जैसे गेहूं, सरसों और चना बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
किसानों का कहना है कि इस बार मानसून के बाद अचानक आई ठंड और कहीं-कहीं हुई ओलावृष्टि ने फसलों को काफी क्षति पहुंचाई है। गेहूं की फसल जो इस क्षेत्र की मुख्य दिहाड़ी है, वह कई जगहों पर पीली पड़ गई है या पूरी तरह सूख चुकी है। इसके साथ ही सरसों की फसल भी कई इलाकों में खराब हो गई है, जिससे उत्पादन पर सीधे प्रभाव पड़ा है। चने की फसल पर भी बीमारी और कीट संक्रमण ने भारी प्रहार किया है।
भरतपुर कृषि विभाग के अधिकारी इस नुकसान की पुष्टि करते हुए बताते हैं कि फिलहाल आंकड़ों के अनुसार लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक किसानों की फसल प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में किसानों को त्वरित मुआवजा देने एवं पुनरारंभ की योजनाओं को लागू करने की आवश्यकता है।
किसान नेता सुनील कुमार ने कहा, “हमने कई बार मौखिक और लिखित में प्रशासन से विनती की है कि फसल क्षति के लिए हमें उचित मुआवजा दिया जाए। कई परिवार इस नुकसान की वजह से आर्थिक संकट में हैं।” उन्होंने आगे कहा कि फसल बीमा योजनाओं को और प्रभावी बनाकर किसानों को वास्तविक मदद पहुंचाई जानी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में फसल नुकसान का आंकलन करने के लिए विशेष टीमें गठित कर दी हैं। वहीं कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को उचित खेती के तरीकों और बीमा का लाभ लेने के लिए जागरूक करने में लगे हुए हैं।
इस समस्या का समाधान निकालना भविष्योन्मुखी कृषि रणनीति के लिए अनिवार्य है ताकि किसानों को अनियमित मौसमी स्थितियों से उबरने में मदद मिले और वे अपने रोजगार और जीवन स्तर को बेहतर बना सकें।
भरतपुर जिले की यह स्थिति राजस्थान के अन्य कई कृषि प्रधान इलाकों के लिए भी एक चेतावनी है कि कृषि संकट के बीच किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए स्थायी व उचित कदम उठाए जाने चाहिए।




