सिरोही

लंगूर के बच्चे के मुंह में फंसा लोटा, 2 दिन तक मिली कोई मदद नहीं, फिर आई रेस्क्यू टीम और सामने आया नया मोड़

नई दिल्ली, दिल्ली। राजधानी के एक पार्क में लंगूर के बच्चे के मुंह में फंसा हुआ एक लोटा देखकर स्थानीय लोगों की चिंता तब बढ़ गई जब दो दिन बाद भी उसकी कोई मदद नहीं हुई।

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचित किया गया, जो घटनास्थल पर पहुंची और तुरंत कार्यवाही शुरू की। हालांकि, जैसे-जैसे रेस्क्यू टीम ने प्रयास शुरू किया, कहानी में एक और ट्विस्ट सामने आया।

स्थानीय लोगों की मानें तो लंगूर के बच्चे के मुंह में लोटा फंसे होने के कारण वह खाना-पीना भी बंद कर चुका था जिससे उसकी हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही थी। घटनास्थल पर मौजूद वन अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि दो दिन तक इन तमाम परिस्थितियों के बावजूद लंगूर की मदद नहीं आ पाई क्योंकि उन्हें सही समय पर सूचना नहीं मिली।

इस बीच, सोशल मीडिया पर इस घटना ने जबरदस्त ध्यान आकर्षित किया। कई लोग और पशु-प्रेमी वन विभाग से जल्द से जल्द कार्रवाई करने की अपील कर रहे थे।

रेस्क्यू टीम ने सूक्ष्म प्रयासों के बाद लोटा निकालने में सफलता हासिल की, लेकिन इस दौरान यह पता चला कि लंगूर की मां भी उसी क्षेत्र में है जो तनावग्रस्त और चिंतित दिख रही थी। वन विभाग ने इन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने का निर्णय लिया।

इस घटना ने यह भी सवाल जगाए कि शहरी इलाकों में वन्यजीवों की सुरक्षा व देखभाल पर कौन जिम्मेदार है और किस प्रकार ऐसे मामलों को जल्द संज्ञान लिया जाना चाहिए ताकि जानवरों को समय पर मदद मिल सके।

वन विभाग ने आवाम से अपील की है कि यदि वे किसी वन्यजीव को संकट में देखें तो तुरंत संबंधित अधिकारियों या वन विभाग को सूचित करें। उन्होंने आगे बताया कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए जनता की जागरुकता जरूरी है।

इस पूरी घटना ने यह साफ कर दिया कि मनुष्य और वन्यजीवों के बीच तालमेल बनाए रखना अनिवार्य है, जिससे दोनों के जीवन सुरक्षित और सुखद हो सकें।

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