पंचायत चुनाव : अवमानना नोटिस के जवाब में आयोग ने शुरू की तैयारी, सरकार भी बढ़ाएगी समय सीमा, हाईकोर्ट में जल्द आवेदन
नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश। निकाय और पंचायत चुनाव में हो रही देरी पर उच्च न्यायालय द्वारा जारी अवमानना नोटिस के बाद राज्य निर्वाचन आयोग प्रतिक्रिया देने की पूरी तैयारी में है। इस बीच, शासन की ओर से भी चुनाव प्रक्रिया में अधिक समय प्रदान करने के लिए इस सप्ताह स्थगन आदेश को लेकर हाईकोर्ट में आवेदन दायर करने की योजना बनाई जा रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी तक चुनावों के मुद्दे पर कई कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक अड़चनों के कारण चुनाव तिथियों का निर्धारण नहीं कर पाया। उच्च न्यायालय द्वारा आयोग और संबंधित विभागों से जवाब तलब करने के बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कड़ी मेहनत शुरू कर दी है ताकि समय पर संतोषजनक जवाब अदालत को दिया जा सके।
प्रदेश की सरकार का पक्ष है कि वर्तमान परिस्थितियों में चुनाव आयोजन करना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए समय सीमा बढ़ाना आवश्यक है ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और सुचारू रूप से हो सके। इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर एक विस्तृत अध्ययन चल रहा है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में हाईकोर्ट में आवेदन किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा है कि चुनाव में विलंब क्यों हो रहा है, और क्या समय सीमा बढ़ाने के लिए कोई वैधानिक आधार है। इसके साथ ही न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचने के लिए कड़े निर्देश भी दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावों में अधिक देरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सकारात्मक संकेत नहीं है। इसलिए आयोग और सरकार दोनों को न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए जल्द से जल्द चुनाव आयोजित कराने की रणनीति बनानी चाहिए।
राज्य निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया, “हमने सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठकें कर ली हैं और जल्द ही हर जरूरी दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि चुनाव प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।”
सरकारी सूत्रों के अनुसार, चुनावों को लेकर केंद्र सरकार से भी आवश्यक राय ली जा रही है, ताकि किसी भी कानूनी या प्रशासनिक विवाद को टाला जा सके।
इस पूरे प्रकरण पर राजनीतिक दल भी सक्रिय हैं और वे चुनाव में किसी भी विलंब को लेकर चिंता जता रहे हैं। जनता में भी चुनाव को लेकर दिख रही देरी से निराशा व्याप्त है, क्योंकि पंचायत और निकाय चुनाव स्थानीय शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इस विवाद के निपटारे के लिए आयोग और सरकार दोनों ही प्रयासरत हैं कि आगामी दो सप्ताह में हाईकोर्ट को संतोषजनक समाधान प्रस्तुत किया जा सके और चुनाव प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ हो।
इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और चुनाव तिथियों की घोषणा को लेकर सभी की निगाहें राज्य एवं उच्चतम न्यायालय की ओर टिकी हैं।




