जयपुर

राजस्थान में जर्जर आंगनवाड़ी भवनों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करने के निर्देश, दीया कुमारी ने बताया रोडमैप

जयपुर, राजस्थान। राज्य में जर्जर व किराए के भवनों में संचालित हो रहे आंगनवाड़ी केन्द्रों को पास के सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय महिला एवं बाल विकास विभाग की बैठक में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के निर्देशन में लिया गया। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों की गुणवत्तापूर्ण सेवा में सुधार करना और बच्चों को बेहतर शिक्षा एवं सुविधाएं प्रदान करना है।

सांसद दीया कुमारी का कहना है कि जिन आंगनवाड़ी केन्द्रों का भवन खराब स्थिति में है या जो एक कमरे में संचालित हो रहे हैं, उन्हें जल्द से जल्द नजदीकी सरकारी स्कूल के परिसर में शिफ्ट किया जाएगा। इससे बच्चों को सुरक्षा, स्वच्छता और उचित शिक्षा सामग्री मिलेगी। साथ ही आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्थिति की ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए शाला दर्पण पोर्टल पर उनका मैपिंग भी अनिवार्य कर दी गई है।

शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से ये सुनिश्चित किया जाएगा कि आंगनवाड़ी केन्द्रों का स्थान, उनकी सुविधाएं और बच्चों की संख्या जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ समय-समय पर अपडेट होती रहें। इससे प्रदेश सरकार को पूर्व शिक्षा के क्षेत्र में सुधार हेतु प्रभावी नीति बनाने में मदद मिलेगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत प्राथमिकता उन आंगनवाड़ी केंद्रों को दी जाएगी जो किराये के भवनों में या असुरक्षित स्थानों पर संचालित हो रहे हैं। बच्चों की सुरक्षित शिक्षा एवं विकास सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण और भवन संरचना दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

आंगनवाड़ी केन्द्रों के सरकारी स्कूलों में स्थानांतरण से न केवल बच्चों की शिक्षा के स्तर में सुधार होगा, बल्कि यह कदम उनके समग्र विकास के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने वाला साबित होगा। सरकार का यह भी प्रयास है कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक समर्थन भी उपलब्ध कराए जाएं।

इस योजना के लागू होने से राजस्थान में आंगनवाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने अधिकारियों को शीघ्रता से सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं ताकि यह परिवर्तन जल्द से जल्द पूरी राज्य में प्रभावी रूप से हो सके।

इस पहल की सराहना सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा विशेषज्ञ भी कर रहे हैं, जो मानते हैं कि यह कदम राजस्थान में प्रारंभिक शिक्षा एवं बाल विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले समय में इस योजना का विस्तृत क्रियान्वयन सभी जिलों में होगा और रिपोर्ट नियमित रूप से जारी की जाएगी।

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