नागौर

अधिकारियों ने ठेकेदार के सामने झुका दाव, काम में हो रही देरी से प्रभावित हो रही मरीज सुविधाएं

नागौर, राजस्थान

नागौर जिले के जेएलएन राजकीय जिला अस्पताल परिसर में पिछले सवा तीन वर्षों से निर्माणाधीन 190 बेड के अस्पताल भवन का कार्य अभी भी अधूरा है। यह भवन जुलाई 2024 तक पूरा होना था, लेकिन अब तक 20 महीने से अधिक का विलंब हो चुका है। इससे मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

भवन के निर्माण का जिम्मा राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (आरएसआरडीसी) को सौंपा गया था। निगम ने इस परियोजना के लिए चार बार डेडलाइन बढ़ाई है, लेकिन ठेकेदार की ओर से समय पर कार्य पूरा नहीं किया जा रहा। ठेकेदार पिछले महीने से कई महत्वपूर्ण कार्य धाराएं, जैसे फायर फाइटिंग सिस्टम के साथ डक्टिंग, सेंट्रल लाइन, एयर कंडीशनर, लिफ्ट, सीसीटीवी कैमरे और ऑक्सीजन लाइन तथा मोड्यूलर ओटी आदि का कार्य रोक दिया है।

इस कारण बिल्डिंग का फिनिशिंग कार्य अधर में लटका हुआ है और जेएलएन अस्पताल में इलाज के लिए आवश्यक सुविधाएं बाधित हो रही हैं। अधिशासी अभियंता आरएसआरडीसी का कहना है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और ठेकेदार को मई 2026 तक काम पूरा करने की अंतिम तिथि दी गई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों एवं मरीजों के अनुसार भवन के अधूरे रह जाने से अस्पताल की क्षमता प्रभावित हो रही है। नए भवन में सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई, फायर सेफ्टी और अन्य आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जानी थीं, लेकिन विलंब के कारण मरीजों को मौजूदा सीमित संसाधनों में ही इलाज कराना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए समय पर निर्माण कार्य पूरा होना जरूरी है, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके। वहीं दूसरी ओर, कई बार विभागीय अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों के आगे हथियार डालने का आरोप भी लग रहा है, जिसके कारण निर्माण कार्य सुस्त पड़ गया है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे और जवाबदेही तय करनी होगी, ताकि मरीजों को इस विलंब का खामियाजा न भुगतना पड़े। नागौर के इस अस्पताल परियोजना की समयसीमा पर नजर बनाकर कार्य पूरा कराना आवश्यक बताया जा रहा है।

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