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नागौर न्यूज़: कबाड़ से होगा नया transformation, जड़ा तालाब में दिखेंगे बाघ और मोर

नागौर, राजस्थान – शहर के बीचोबीच स्थित जड़ा तालाब का स्वरूप बहुत जल्द बदलने वाला है। मुख्यमंत्री द्वारा बजट में किए गए आवंटन के तहत यहां वेस्ट टू वेल्थ पार्क विकसित किया जा रहा है, जिसमें कबाड़ से बनायीं जाने वाली कला संरचनाएं पर्यटकों और नागरिकों को आकर्षित करेंगी।

यह परियोजना नागौर नगरपरिषद की पहल है, जो प्रदेश स्तर पर सभी पार्कों के सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से शुरू की गई है। नगरपरिषद ने जड़ा तालाब की लोकेशन को देखते हुए इसे वेस्ट टू वेल्थ पार्क में बदलने का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे पिछले वर्ष 18 अगस्त को मंजूरी मिली। स्वीकृति के पश्चात प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा कर अब काम शुरू कर दिया गया है।

इस योजना के तहत दिल्ली की एक एजेंसी को करीब 28 लाख रुपये की लागत से अनुबंध दिया गया है। एजेंसी पुराने लोहे के कबाड़, अनुपयोगी धातु और अन्य बर्बाद सामग्रियों का उपयोग कर आकर्षक कला निर्माण कर रही है। इनमें ऊंट, भारत का नक्शा, बाघ और मोर जैसे जीव-जंतु की मूर्तियां शामिल हैं, जो तालाब के सौंदर्य को चार गुना बढ़ाएंगी।

नगर परिषद अधिकारियों का मानना है कि ये कला संरचनाएं न केवल पार्क की शोभा बढ़ाएंगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देंगी, जो संसाधनों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देगी। कबाड़ से बनी ये मूर्तियां पर्यटकों के लिए एक अनोखी दृष्टि होंगी तथा युवाओं में जागरूकता पैदा करेंगी कि अवश्य ही अधीन संसाधनों को पुनः इस्तेमाल किया जा सकता है।

जड़ा तालाब का यह नवीनीकरण प्रोजेक्ट नागौर शहर के विकास को एक नई दिशा दे रहा है और स्थानीय नागरिकों के लिए एक खूबसूरत आवासीय और पर्यटक स्थल प्रदान करेगा। आगामी महीनों में यह पार्क पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा और शहरवासियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन जाएगा।

नगरपरिषद का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा इस तरह के कई प्रोजेक्ट पर बजट आवंटन करने से प्रदेश के अन्य शहरों में भी इसी प्रकार की परियोजनाएं जल्द शुरू होंगी जिससे समग्र रूप से प्रदेश की छवि में सुधार होगा। नागौर की यह पहल न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक रूप से भी लाभदायक सिद्ध होगी क्योंकि पर्यटन में वृद्धि से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

इस परियोजना से नागौर में पर्यावरण संरक्षण, कला और पर्यटन का त्रिवेणी मिलन देखने को मिलेगा, जो आने वाले वर्षों में इसे राजस्थान के प्रमुख आकर्षण स्थलों में शामिल करेगा।

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