बीकानेर समाचार: रेतीले टीलों से रोजगार केंद्र बना श्रीडूंगरगढ़, कृषि व उद्योगों ने बदली पूरे क्षेत्र की तस्वीर

श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर। राजस्थान के श्रीडूंगरगढ़ तहसील क्षेत्र ने पिछले कुछ दशकों में अपार बदलाव देखे हैं। कभी रेतीले टीलों के बीच संघर्षपूर्ण जीवन बिताने वाली यह जगह अब कृषि और उससे जुड़े उद्योगों के कारण रोजगार का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है।
ठुकरियासर क्षेत्र के किसानों ने हरित क्रांति जैसी प्रगतिशील तकनीकों को अपनाकर कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। बीते तीस वर्षों में उपज बढ़ी है, जिससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई है बल्कि प्रवासी मजदूरों के लिए भी नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं।
कृषि आधारित उद्योगों के विकास ने भी इस क्षेत्र की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। छोटे और मझोले स्तर के उद्योग स्थापित हुए हैं जो न केवल स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करते हैं बल्कि आसपास के इलाकों में भी रोजगार प्रदान करते हैं। इनमें अनाज प्रसंस्करण, वस्त्र निर्माण और कुटीर उद्योग प्रमुख हैं।
श्रीडूंगरगढ़ के किसानों ने अनाज उत्पादन के साथ-साथ मत्स्य पालन और पशुपालन को भी अपनाया है, जिससे उनकी आय में विविधता आई है। स्थानीय प्रशासन ने कृषि सुधारों और उद्योगों के विकास के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिनका लाभ क्षेत्र के किसान और मजदूर उठा रहे हैं।
स्थानीय बाजार में कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से व्यापार भी फल-फूल रहा है। इसके साथ ही, श्रमिक वर्ग के लिए छिटपुट नौकरी से लेकर स्थायी रोजगार तक के अवसर बढ़े हैं, जिससे रोजगार की वैश्विक चुनौती को यहां कम किया जा सका है।
इस क्षेत्र में शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे युवा वर्ग न केवल कृषि में बल्कि उद्योगों में भी दक्ष हो रहा है। सरकार की विभिन्न कौशल विकास योजनाएं युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार कर रही हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो श्रीडूंगरढ़ तहसील क्षेत्र ने रेतीले टीलों के बीच से अपने आप को न केवल कृषि एवं उद्योगों के क्षेत्र में स्थापित किया है, बल्कि रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। यह क्षेत्र आज जीवन के बेहतर अवसर प्रदान कर रहा है और भविष्य में भी विकास की संभावनाएं यहां उज्ज्वल नजर आ रही हैं।




