बूंदी: तीस गांव के सैकड़ों किसान सरकार की योजनाओं से वंचित

केशवरायपाटन, राजस्थान। केशवरायपाटन तहसील के तीस गांवों के चार हजार किसानों को पिछले 25 वर्षों से सरकार की योजनाओं से लाभ न मिलने की मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। इन किसानों की कृषि भूमि ऑनलाइन पंजीकरण में न होने के कारण वे केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं से वंचित रह गए हैं। यह समस्या सेटलमेंट और कैचमेंट के समय हुई लापरवाही के कारण उत्पन्न हुई है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, लगभग दो दशकों से अधिक समय से भूमि रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया अधूरी रही है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के किसानों को फसल बीमा, सब्सिडी, और ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है और खेती में उनका नुकसान बढ़ा है।
किसानों का कहना है कि वे सरकार की योजनाओं के दायरे में आते हैं, लेकिन अनऑनलाइन रिकॉर्ड के कारण उन्हें समर्थन नहीं मिल पा रहा। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द इस समस्या को समाधान किया जाए ताकि वे भी सरकार की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
वहीं, तहसील प्रशासन का कहना है कि इस मामले की जांच चल रही है और जल्द ही भूमि पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लॉडिंग और रिकॉर्ड की शुद्धता कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ ही किसानों के विकास में मदद करती है। यदि समय रहते इस समस्या को ठीक न किया गया, तो इससे खेती में और भी कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।
राज्य सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता से लेकर संभावित समाधान करें ताकि लाखों किसान इन डिजिटल युग में भी पीछे न रहें और उन्हें वह सुविधा मिले जिसके वे अधिकारी हैं।



