राजस्थान ग्रीन एक्सप्रेसवे : कोटपुतली–किशनगढ़ ग्रीन एक्सप्रेसवे की डीपीआर क्यों नहीं बनी? जानिए वजह

जयपुर, राजस्थान
राजस्थान सरकार ने दक्षिण राजस्थान को राजधानी जयपुर से जोड़ने के लिए कोटपुतली–किशनगढ़ ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाने की योजना घोषित की थी। मुख्यमंत्री ने अपने पहले बजट भाषण में इस प्रोजेक्ट को विशेष महत्व देते हुए यात्रा समय में कमी लाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने का लक्ष्य बताया था। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के दो साल बाद भी डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार नहीं हो पाई है, जिससे परियोजना की प्रगति थम गई है।
ग्रीन एक्सप्रेसवे का उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल तरीके से सड़क अवसंरचना का विकास करना है, जो यात्रियों के लिए बेहतर सुविधा और दक्षता प्रदान करे। कोटपुतली से किशनगढ़ तक बनने वाला यह एक्सप्रेस वे न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि दक्षिण राजस्थान के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डीपीआर के न बनने के पीछे विभिन्न कारण हैं, जिनमें तकनीकी जटिलताएँ, भूमि अधिग्रहण में समस्याएँ, वित्तीय अनुमोदन विलंब और पर्यावरणीय अनुमतियों में देरी मुख्य हैं। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं।
परियोजना के अधूरे पड़ने से प्रभावित क्षेत्र के लोगों में असंतोष भी देखने को मिल रहा है। कई व्यापारिक वर्ग और आम नागरिक इस एक्सप्रेसवे के जल्द शुरू होने के इच्छुक हैं क्योंकि यह क्षेत्र की समृद्धि और रोजगार के अवसर बढ़ाएगा।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि शीघ्र ही डीपीआर के अंतिम चरण को पूरा कर परियोजना को गति प्रदान की जाएगी, ताकि दक्षिण राजस्थान और राजधानी के बीच संपर्क बेहतर हो सके। इस पहल से न केवल यातायात के बोझ में कमी आएगी, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक संभावनाएं भी नए आयाम छुएंगी।
कोटपुतली–किशनगढ़ ग्रीन एक्सप्रेसवे का सफल निर्माण राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण विकास संकेत होगा, जो पूरे प्रदेश के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगा। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




