राजस्थान में बीजेपी विधायक के पुत्र पर यौन शोषण का आरोप, पीड़िता ने SP से सुरक्षा की मांग की

राजसमंद। भीम विधानसभा क्षेत्र के विधायक हरिसिंह रावत के पुत्र रणजीत सिंह रावत इन दिनों एक गंभीर आरोप के चलते चर्चा में हैं। ब्यावर जिले की एक महिला ने राजसमंद पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल के सामने यौन शोषण और प्रताड़ना से जुड़ा एक परिवाद प्रस्तुत किया है। पीड़िता का कहना है कि रणजीत सिंह रावत ने उनके साथ अनुचित और आपराधिक कृत्य किए हैं, जिससे उनकी मानसिक व शारीरिक स्थिति खराब हुई है।
पीड़िता ने एसपी को एक ज्ञापन सौंपकर साथ ही कुछ साक्ष्य भी प्रदान किए हैं, जो मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं। उनका आरोप है कि मामले की जांच में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए और उन्हें कानून के तहत पूरी सुरक्षा भी मिले, क्योंकि उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है।
राजसमंद पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल ने इस मामले में कहा है कि मामले की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।
बीजेपी विधायक हरिसिंह रावत ने इस मामले पर फिलहाल टिप्पणी करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि मामले की जांच के बाद ही कोई पदोत्तरी करनी उचित होगी। स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों की ओर से भी इस मामले पर ध्यान देने और न्याय सुनिश्चित करने की मांग उठी है।
राजसमंद और ब्यावर क्षेत्र में यह मामला काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता और अधिकार समूह पीड़िता को न्याय दिलाने और किसी भी दबाव से मुक्त करने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों के आरोपों की जांच में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई बेहद आवश्यक है ताकि पीड़िता का आत्मविश्वास बना रहे और अपराधियों को कानून के कटघरे में लाया जा सके।
इस बीच पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की है, जो जल्द ही आरोपों की तहकीकात करेगी। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोप सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पीड़िता की सुरक्षा के लिए पुलिस ने अतिरिक्त प्रबंध किए हैं और उन्हें हर प्रकार का कानूनी सहायता भी देने का आश्वासन दिया है।
यह मामला राजस्थान में सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक परिवारों में व्याप्त यौन शोषण और उत्पीड़न के मुद्दों पर एक बार फिर से सवाल खड़े करता दिख रहा है। समाज की विभिन्न शक्तियां इस तरह के घटनाक्रमों को रोकने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दे रही हैं।



