चित्तौड़गढ़: अफीम तौल में वसूली का नशा, 1500 की रिश्वत दो नहीं तो आपकी उपज होगी ‘घटिया’, कैटेगरी के नाम पर खेल

चित्तौड़गढ़, राजस्व रिपोर्टर: बेगूं और रावतभाटा क्षेत्र में अफीम की तौल प्रक्रिया विवादों और आरोपों का केंद्र बन चुकी है। नारकोटिक्स विभाग द्वारा तौल व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन किसानों के बीच विभाग के कर्मचारियों पर रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
किसान जो अपनी मेहनत और बलिदान के बाद ‘काला सोना’ अफीम की खेती करते हैं, अब उनका कहना है कि विभागीय अफसरों और तौल कर्मचारियों द्वारा उन्हें मनमानी रिश्वत राशि की मांग की जा रही है। कृषि उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर कैटेगरी निर्धारित करने के नाम पर कई बार किसानों को यह भी धमकी दी जाती है कि यदि निर्धारित राशि नहीं दी गई तो उनकी उपज को ‘घटिया’ बताकर कम कीमत पर खरीदा जाएगा या तौल में कम आँका जाएगा।
स्थानीय किसानों के प्रतिनिधि ने बताया कि इस तरह की वसूली से उनके आर्थिक हालात और भी खराब हो रहे हैं। “हम दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन अफसरों के इस खेल के कारण हमारा मेहनताना बर्बाद हो रहा है,” उन्होंने कहा। कई किसानों ने गोपनीय तौर पर बताया कि 1500 रुपये तक की रिश्वत मांगी जाती है, जो उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा है।
वहीं, नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तौल प्रक्रिया को पारदर्शी और ईमानदार बनाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। “हमने प्रक्रिया में सुधार किए हैं और भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए निगरानी बढ़ाई है,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। हालांकि, किसान यह बदलाव महसूस करने में असमर्थ हैं और उनका मानना है कि समस्या अभी भी जमीनी स्तर पर कायम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अफीम की तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र होना चाहिए। इससे किसानों और विभाग दोनों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और भ्रष्टाचार की घटनाएं कम होंगी।
स्थानीय प्रशासन से भी मांग है कि वे किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लें और उचित कार्रवाई करें ताकि अफीम तौल प्रक्रिया में चल रहे भ्रष्टाचार का अंत हो सके। किसानों की आजीविका और कृषि क्षेत्र की स्थिरता के लिए यह एक अनिवार्य कदम है।
परिणामस्वरूप, बेगूं और रावतभाटा के किसान इस सिस्टम में सुधार की गुहार लगा रहे हैं, ताकि वे बिना किसी भय या हेकड़ी के अपनी मेहनत की कमाई को न्यायपूर्ण मूल्य पर बेच सकें।




