राजसमंद

8 माह से बंद स्कूल, फतहपुरा के बच्चों की पढ़ाई धर्मशाला में जारी, भविष्य हुआ अनिश्चित

फतहपुरा, भाटोली ग्राम पंचायत। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, जो कि फतहपुरा गांव में स्थित है, पिछले 8 महीनों से शिक्षा के लिए खतरा साबित हो रहा है। अप्रिय घटना यह है कि विद्यालय का भवन जमींदोज हो चुका है और अभी तक नए भवन की स्वीकृति नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गई है।

शिक्षा के अधिकार और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। स्कूल भवन न होने के कारण क्षेत्र के बच्चे शनि महाराज मंदिर के पास बने धर्मशाला में बैठकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, जो कि स्कूल जैसी सुविधाओं से दूर है। यहां न तो पर्याप्त बैठने की व्यवस्था है और न ही शैक्षिक सामग्री उपलब्ध है, जिससे बच्चों के लिए पढ़ाई करना कठिन हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति में बच्चों का मनोबल गिरता है और उनकी शैक्षिक गुणवत्ता पर बड़ा असर पड़ता है। शिक्षकों के लिए भी कार्य करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि धर्मशाला मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। जल, बिजली, शिक्षण सामग्री और साफ-सफाई जैसी आवश्यकताओं की कमी के कारण यहां पढ़ाई करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

ग्राम पंचायत अधिकारियों ने बताया कि नए भवन के लिए आवेदन लंबित पड़ा है और स्वीकृति प्रक्रियाओं में देरी की वजह से काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। उनका यह भी कहना है कि जल्द ही मामले को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।

फतहपुरा के अभिभावकों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर स्कूल भवन निर्माण की स्वीकृति दिलवाने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों का भविष्य अधर में है और शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहनी चाहिए। स्थानीय विद्यालय कॉलूनियों एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए एक बेहतर व सुरक्षित स्कूल भवन की सख्त जरूरत है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की शिक्षा के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण होना अनिवार्य है। धर्मशाला में पढ़ना अस्थायी उपाय हो सकता है, लेकिन इसे दीर्घकालिक समाधान नहीं माना जा सकता। सरकार द्वारा जल्द निर्णय और कार्यवाही से ही इस समस्या का समाधान संभव है।

फिलहाल, फतहपुरा के बच्चे संघर्ष के बीच पढ़ाई कर रहे हैं और सभी संबंधित विभागों से अपील की जा रही है कि वे इसकी गंभीरता को समझकर त्वरित कदम उठाएं। ताकि इन बच्चों का उज्जवल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके और शिक्षा व्यवस्था को निरंतरता मिले।

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