प्रतापगढ़: कर्मचारियों की हड़ताल से सहकारी व्यवस्थाएं ठप, खाद-बीज वितरण और ऋण वसूली बंद, किसान परेशान

प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल का असर किसानों की दिनचर्या पर गहरा पड़ा है। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर पिछले 27 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे कर्मचारी किसानों को मिलने वाली महत्वपूर्ण सेवाओं में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
हड़ताल के कारण सहकारी समितियों के माध्यम से वितरित होने वाला खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री का वितरण पूरी तरह से ठप हो चुका है। इसके साथ ही किसानों की ऋण वसूली की प्रक्रिया भी बंद है, जिससे किसानों को वित्तीय सहायता से लाभ पहुँचाना भी नामुमकिन हो गया है।
स्थानीय किसान संगठनों का कहना है कि सहकारी समितियों की भूमिका कृषि सुधार और किसान कल्याण में अहम मानी जाती है। ऐसे में कर्मचारियों की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल से किसानों की समस्याएं बढ़ गई हैं। उन्होंने सरकार से जल्द हस्तक्षेप करने और वार्ता शुरू करने की अपील की है ताकि इस स्थिति को शीघ्र हल किया जा सके।
राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कर्मचारियों के बेहतर प्रबंधन और अधिकार सुरक्षित करने के लिए स्वतंत्र कैडर अथॉरिटी के गठन की मांग रखी है। उनका कहना है कि वर्तमान प्रबंधन प्रणाली कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने में असमर्थ है, जिसके चलते उनकी मांगें अनसुनी रह रही हैं और संघर्ष जारी है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। प्रशासन ने किसानों को उक्त असुविधा के लिए क्षमा मांगी है और जल्द से जल्द समस्या का समाधान निकालने का वादा किया है। उधर, किसान भी प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द से जल्द सहकारी सेवाएं पुनः शुरू होंगी ताकि उनकी खेती संबंधित कार्य प्रभावित न हों।
प्रतापगढ़ जिले की कृषि अर्थव्यवस्था सहकारी समितियों पर काफी हद तक निर्भर है, इसलिए हड़ताल के असर को लेकर चिंता जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि वे सहकारी समितियों के माध्यम से सस्ती दरों पर बीज और खाद खरीदते हैं, और यदि ये सेवाएं नहीं मिलतीं तो उन्हें महंगे बाजार विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे उनकी लागत बढ़ेगी और खेती की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
राज्य सरकार को चाहिए कि वे इस मामले में तेजी से कार्यवाही करें और कर्मचारियों व किसान दोनों पक्षों की समस्याओं को समझते हुए समाधान निकालें। सहकारी समिति प्रणाली को पुनः सक्रिय और मजबूत करके किसानों को उनकी मूलभूत जरूरतें सुचारु रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
वर्तमान स्थिति में जब भारत कृषि आधारित देश है, तब ऐसे अवरुद्ध सहयोगी तंत्र किसानों की आय में सुधार लाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी बाधा बन सकते हैं। इसलिए इस हड़ताल का शीघ्र हल निकालना आवश्यक है ताकि प्रतापगढ़ जिले के किसान अपने कृषि कार्यों को बिना किसी परेशानी के जारी रख सकें।




