राजस्थान में 2348 करोड़ रुपए की बिजली गायब, 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन के बावजूद तार नहीं पहुंचा रही बिजली

राजस्थान में बिजली प्रसारण व्यवस्था में सुधार के बावजूद ट्रांसमिशन लॉसेस यानी प्रसारण क्षति कम नहीं हो रही है। इसी वजह से राज्य में प्रतिवर्ष 2348 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त भार उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों की माने तो यह क्षति कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है, जिससे विद्युत वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न उठ रहे हैं।
राजस्थान में विद्युत वितरण लॉसेस में निश्चित रूप से सुधार हुआ है, जिससे उपभोक्ताओं को बिजली की उपलब्धता बेहतर हुई है। लेकिन प्रसारण स्तर पर क्षति की उच्च दर ने वितरण निगमों को अतिरिक्त बिजली खरीदने पर मजबूर कर दिया है। यह स्थिति न केवल निगमों के वित्तीय स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में वृद्धि का कारण भी बन रही है।
राज्य सरकार और विद्युत विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि विद्युत वितरण में सुधार के लिए कई योजनाएं और परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन ट्रांसमिशन नेटवर्क के आधुनिकीकरण और बेहतर निगरानी के अभाव में प्रसारण क्षति लगातार बनी हुई है। तकनीकी खामियों, पुराने तारों और अव्यवस्थित केबल नेटवर्क के कारण भी यह समस्या गंभीर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि राजस्थान को डिजिटलीकरण और स्मार्ट ग्रिड तकनीक के माध्यम से अपनी विद्युत वितरण प्रणाली को मजबूत बनाना होगा। साथ ही, नियमित रखरखाव और गुणवत्ता नियंत्रण के उपायों को तेज करना होगा ताकि टंकी-टंकी बिजली की रेखाएं सुचारू रुप से संचालित हो सकें।
वर्तमान में राजस्थान में लगभग 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है, लेकिन कई बार जरूरत पडऩे पर पर्याप्त बिजली भेजने के लिए तार अधूरे या क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें मिलती रहती हैं। इससे क्षेत्रीय स्तर पर बिजली की पहुँच प्रभावित होती है और पावर कट बढ़ते हैं।
राजस्थान में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है, खासतौर पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकास के कारण। इस बढ़ती मांग के बीच, ट्रांसमिशन लॉसेस को कम करना अत्यंत आवश्यक हो गया है ताकि बिजली उपलब्धता बढ़े और लागत कम हो।
समय रहते उचित कदम न उठाए गए तो उपभोक्ताओं पर आने वाले वित्तीय दबाव के साथ ही सरकार की ऊर्जा नीतियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसलिए, आवश्यक है कि राज्य सरकार और विद्युत विभाग मिलकर इन चुनौतियों का समाधान निकालें और राजस्थान की विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूती दें।


