चूरू

मौसम का कहर : जब आसमान हुआ क्रोधित, ओलावृष्टि और बिजली से बढ़ी चूरू की धड़कनें

चूरू, राजस्थान। मरुस्थलीय इलाके के रूप में प्रसिद्ध चूरू में इस बार वैशाख माह में असामान्य एवं भयावह मौसम ने लोगों के होश उड़ा दिए। आमतौर पर यहां की गर्म हवाओं के बीच मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिलना दुर्लभ होता है, लेकिन वैशाख कृष्ण पक्ष षष्ठी की पूर्व संध्या पर अचानक चली तुफानी हवा और साथ ही ओलावृष्टि ने पूरी मरुधरा को दहला दिया।

रात के समय अचानक आंधी तूफान जैसे झोंकों ने लोगों को चौंका दिया। बेर के आकार के ओले गिरने से कई स्थानों पर फसलों को नुकसान पहुँचा है। यह संकटजनक स्थिति इतनी तीव्र थी कि मानो प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाने का प्रयास किया हो। बारिश और ओलावृष्टि के साथ तेज बिजली चमकने लगी, जिससे इलाके में डर का माहौल व्याप्त हो गया।

हालांकि कुछ ही मिनटों बाद हवा ने अपना प्रकोप कम कर दिया और ओलावृष्टि भी रुक गई। इससे स्थानीय लोग राहत की सांस ले सके। कई परिवारों की नींद टूट गई थी, जो अब गहरे संकल्प के साथ आभार प्रकट करते नजर आए। उन्होंने इस अप्रत्याशित प्राकृतिक प्रकोप से बचाव के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

मौसम विभाग ने इस घटना को लेकर यलो अलर्ट जारी रखा और बताया कि अगले कुछ दिनों में मौसम में फिर बदलाव संभव है। बुधवार को दर्ज न्यूनतम तापमान 15.7 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने किसानों और आम जनता को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की ओलावृष्टि और तूफानी हवा का घटना क्रम मरुस्थलीय इलाके में असामान्य है, और इसे जलवायु परिवर्तन का एक संकेत माना जा सकता है। स्थानीय प्रशासन ने भी प्रभावित इलाकों में राहत कार्य और नुकसान का आंकलन शुरू कर दिया है।

चूरूवासियों के लिए यह घटना प्रकृति की शक्ति का जीवंत प्रमाण है कि कब और कैसे मौसम अचानक रूप बदल सकता है। इस मौसम की मार से निपटने के लिए लोगों ने एकजुट होकर सतर्कता अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है।

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