भरतपुर के किसानों ने फसल क्षति पर मुआवजे की मांग की
भरतपुर, राजस्थान
भरतपुर जिले के किसानों ने हाल ही में अपनी गेहूं, सरसों और चने की फसलों में भारी नुकसान होने की बात कही है। लगातार बारिश, बिगड़े मौसम और कीट संक्रमण से प्रभावित इन फसलों के बर्बाद होने से किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। उन्होंने राज्य सरकार से त्वरित मुआवजे और आर्थिक सहायता की मांग की है ताकि वे अपनी आय को पुनः स्थिर कर सकें।
किसानों के अनुसार इस बार की फसलें मौसम की अनियमितता और कीटों से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। गेहूं की फसल में धान कीटों ने काफी नुकसान पहुंचाया जबकि सरसों और चने की फसलों में फंगस संक्रमण ने व्यापक नुकसान किया। कई किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं, जिससे उनकी वित्तीय हालत और ज्यादा दयनीय हो गई है।
एक गांव पंचायत के प्रतिनिधि ने बताया कि क्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत किसान इस स्थिति से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, “बिना मुआवजा मिले किसान पुनः बीज नहीं खरीद पाएंगे और आने वाले सीजन की फसल भी प्रभावित हो सकती है।” यह मामला स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग की भी चिंता का विषय बना हुआ है।
सरकार द्वारा कृषि बीमा योजना और मुआवजे की अधिसूचना अभी कई किसानों तक नहीं पहुंच पाई है। कई लोग दावा कर रहे हैं कि बीमा कंपनियों की लंबी औपचारिकताएं और जमीनी स्तर पर जानकारी की कमी के कारण वे लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते वे अपने हालात में सुधार नहीं कर पा रहे।
वहीं, कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे किसानों की समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही फसल नुकसान का आंकलन कर मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करेंगे। साथ ही किसानों को तकनीकी सहायता और उचित बीज उपलब्ध कराने के लिए भी कई पहल की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अप्रत्याशित मौसम और कीट संक्रमण से निपटने के लिए किसानों को बेहतर बीज, फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना होगा। साथ ही सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी व बीमा योजनाओं की प्रभावी जानकारी किसानों तक पहुंचाना भी आवश्यक है।
किसान समूहों ने भी स्थानीय प्रशासन और मीडिया से समस्या को व्यापक स्तर पर उठाने की अपील की है ताकि सही समय पर समाधान निकाला जा सके और कृषि क्षेत्र की स्थिति में सुधार हो सके।




