अफसरों की ‘जय हो’… सरिस्का में इलेक्ट्रिक बसें नहीं चल सकीं, अलवर में नया बस स्टैंड नहीं बन पाया

अलवर, राजस्थान
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के प्रोजेक्ट अक्सर डंप हो जाते हैं, जिससे सरिस्का में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन और अलवर के हनुमान सर्किल पर नया बस स्टैंड अब तक नहीं बन पाया है। परिणामस्वरूप, पुराने बस स्टैंड से बसों का संचालन जारी रहने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और शहर में आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।
मास्टर प्लान में 2021 में शामिल नए बस स्टैंड का निर्माण हनुमान सर्किल पर होना था, जिससे भरतपुर, डीग, तिजारा, बहरोड़, राजगढ़, दिल्ली, गुरुग्राम सहित अन्य जगहों के लिए बस सेवा की सुविधा बेहतर बन सके। पुराने बस स्टैंड पर बढ़े यात्री और बसों का भार शहर में जाम का कारण बन रहा है। इस समस्या को दूर करने के लिए नए बस स्टैंड का प्रस्ताव लाया गया था।
जिला प्रशासन ने एक साल पहले इस प्रस्ताव को सरकार को भेजा, जहाँ से इसे अनुमोदित कर करीब 65 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया। यूआईटी ने छह महीने में जमीन प्रदान की और दो महीने पूर्व निगम को जिम्मेदारी सौंप दी। हालांकि, फर्म चयन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है, क्योंकि जिम्मेदारी जयपुर मुख्यालय की है। स्थानीय अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
इसी प्रकार, सरिस्का में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए भी निगम को फर्म चयन करना था। एक बार टेंडर भी जारी किया गया, पर वह अधर में लटका हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कड़े आदेश दिए थे, फिर भी कोई स्पष्ट हल नहीं निकल पाया है।
इस स्थिति से जाहिर है कि निगम की कार्यप्रणाली अत्यंत धीमी है, जिससे जनहित के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट ठप पड़े हैं। यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रशासन और निगम की कार्यशैली में सुधार नहीं होगा, तब तक इन योजनाओं का पूरा लाभ जनता को नहीं मिल सकेगा।




