प्रोसेस हाउस में सीवरेज के शोधित पानी के उपयोग पर टेक्निकल कमेटी करेगी फैसला

भीलवाड़ा, राजस्थान। भीलवाड़ा जिले में तेजी से गिरते भू-जल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच जिला प्रशासन ने जल संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। जिले के प्रोसेस हाउस को अपनी औद्योगिक मशीनों और बॉयलरों को संचालित करने के लिए अब ताजा पानी या भू-जल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह कदम जिले के पानी के संकट को कम करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
नगर निगम के कुवाड़ा स्थित 30 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले शोधित पानी का उपयोग औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए किया जाएगा या नहीं, इस पर जल्द ही एक टेक्निकल कमेटी अपना फैसला सुनाएगी। कमेटी की यह बैठक और प्रोसेस हाउस का दौरा आगामी बुधवार को निर्धारित किया गया है। इस दौरे में कमेटी के सदस्य प्रोसेस हाउस की मशीनरी और औद्योगिक प्रक्रियाओं की समीक्षा करेंगे और शोधित पानी के उपयोग संबंधी तकनीकी संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे।
जल संकट के इस दौर में यह कदम अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है, क्योंकि भीलवाड़ा का भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है और ताजे पानी की मांग औद्योगिक और घरेलू दोनों स्तरों पर बढ़ती जा रही है। जिला प्रशासन का उद्देश्य शोधित पानी के पुनः उपयोग से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मौजूदा जल संसाधनों की सुरक्षा करना है।
प्रोसेस हाउस के अधिकारी भी इस पहल के लिए सकारात्मक हैं। उन्होंने बताया कि यदि शोधित पानी की गुणवत्ता औद्योगिक उपयोग के अनुकूल पाई जाती है, तो इससे ताजे पानी का संरक्षण होगा और संचालन लागत में भी कमी आएगी। इसके साथ ही, यह कदम प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण की दिशा में भी असरदार साबित होगा।
स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों के अनुसार शोधित पानी को प्रोसेस हाउस में लाने से पूर्व उसकी गुणवत्ता का परीक्षण किया जाएगा। कमेटी द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों और मापदंडों को पूरा करने के बाद ही इसका औद्योगिक उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने लोगो से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण की दिशा में अपनी भूमिका निभाएं और जल के विवेकपूर्ण उपयोग को प्राथमिकता दें। इस पहल से न केवल भीलवाड़ा जिले में पानी की मांग को संतुलित करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है, जहाँ जल संकट की स्थिति गंभीर है।
इस संबंध में प्रशासन और उद्योग जगत के बीच जारी यह संवाद भी दिखाता है कि कैसे स्थानीय स्तर पर सरकार और उद्योग मिलकर जल संरक्षण के लिए काम कर सकते हैं। आने वाले दिनों में टेक्निकल कमेटी की रिपोर्ट और निर्णय भी जिले में जल संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा प्रदान करेगा।




