हनुमानगढ़

क्या राजस्थान में स्किलिंग का बड़ा दावा झूठा? 10.9 लाख प्रशिक्षितों में से केवल 17% को रोजगार मिला

जयपुर, राजस्थान। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत राजस्थान में युवाओं को प्रशिक्षित करने की बड़ी संख्या में कोशिशें की गई हैं। राज्य में अब तक लगभग 10.94 लाख युवाओं को इस योजना के तहत विभिन्न कौशल प्रशिक्षण दिए गए, लेकिन रोजगार मिलना उन सभी के लिए संभव नहीं हो पाया। आंकड़ों के अनुसार, इन प्रशिक्षित युवाओं में से केवल 1.86 लाख यानी करीब 17 प्रतिशत ही रोजगार प्राप्त कर सके हैं। यह आंकड़ा स्किलिंग और रोजगार के बीच की दूरी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य युवाओं को व्यावसायिक कौशल देना और रोजगार के अवसर प्रदान करना है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। लेकिन राजस्थान में इस योजना को लागू करने पर प्राप्त परिणाम मिश्रित हैं। युवाओं की बड़ी संख्या को प्रशिक्षित किया जाना योजना की सफलता का संकेत तो है, लेकिन इन्हें रोजगार से जोड़ पाना अभी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

स्थानीय विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता और स्थानीय रोजगार बाजार के बीच सामंजस्य न हो पाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है। जबकि कई छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग कौशल वाले युवा कर्मचारियों को रोजगार देना चाहते हैं, फिर भी राज्य में व्यापक स्तर पर रोजगार के अवसर सीमित हैं।

राजस्थान सरकार ने इस योजना को बेहतर बनाने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, जैसे कि उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाना, प्रशिक्षण केंद्रों की सुविधाओं में सुधार और प्रशिक्षुओं के लिए रोजगार मेला आयोजित करना। इसके बावजूद, रोजगार की दर में उल्लेखनीय सुधार अभी होना बाकी है।

विश्लेषकों ने सुझाव दिया है कि केवल प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि युवाओं को व्यावहारिक अनुभव और उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इससे वे स्वयं रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं, जिससे बेरोजगारी की समस्या कम हो सकती है।

राजस्थान में कौशल विकास योजना से जुड़ी यह चुनौती केवल राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की युवा नीति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। सरकार, उद्योग और समाज को मिलकर ऐसे समाधान खोजने होंगे जो प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को स्थायी एवं सार्थक रोजगार उपलब्ध कराएं। तभी यह योजना अपने वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त कर पाएगी।

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