अलवर

शहर के बिजलीघर चौराहा व एसएमडी सर्किल पर ट्रैफिक बढ़ा, मार्किंग के अनुसार हटेंगे वेंडर

अलवर, राजस्थान। शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर विकास न्यास (यूआइटी) ने बिजलीघर चौराहा और एसएमडी सर्किल पर ट्रैफिक प्रबंधन का काम शुरू कर दिया है। यहां के ट्रैफिक दबाव और अतिक्रमण को ध्यान में रखते हुए यूआइटी ने सड़क किनारे और चौराहों के आसपास वेंडरों पर रोक लगाने के लिए विशेष मार्किंग कर दी है। इसके अनुसार वेंडर उन सीमाओं के भीतर नहीं रह पाएंगे और जल्द ही उन्हें हटाया जाएगा।

शहर के बिजलीघर चौराहा और एसएमडी सर्किल ऐसे प्रमुख स्थान हैं जहां प्रतिदिन लगभग 30 हजार से अधिक वाहनों की आवाजाही होती है। तेज बढ़ते वाहनों के कारण यहाँ जाम की स्थिति बनती रहती है और सड़कें संकरी पड़ने लगी हैं। इन चौराहों के आसपास वेंडरों द्वारा अतिक्रमण किए जाने से सड़क और भी संकरी हो गई है, जिससे यातायात की समस्या और बढ़ गई है।

यूआइटी के अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण में इन दो महत्वपूर्ण स्थलों पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें स्लिप लेन में किसी भी वेंडर को ठेला लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, सड़क किनारे लगी ग्रिल के बाहर तथा फुटपाथों पर भी वेंडरों को खड़ा होना मनाही है। साथ ही, चौराहों एवं सर्किलों के आसपास दोपहिया और चौपहिया वाहनों को भी सड़क किनारे खड़ा नहीं करने दिया जाएगा। उल्लंघन करने वालों को पहले चेतावनी दी जाएगी, उसके बाद उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

यूआइटी ने अपने सर्वेक्षण में एसएमडी सर्किल, बिजलीघर चौराहा और जेल सर्किल को यातायात के संदर्भ में सबसे अधिक प्रभावित स्थल पाया है जहां ट्रैफिक मैनेजमेंट की सबसे अधिक जरूरत है। इसीलिए दूसरे चरण में जेल सर्किल पर भी इसी तरह का कार्य शुरू किया जाएगा ताकि पूरे शहर में यातायात नियंत्रण बेहतर हो सके।

शहर में बढ़ती गाड़ियों के कारण गौरव पथ जैसे मुख्य मार्गों पर जाम की समस्या अधिक रहती है। यह मार्ग बहरोड़ से तिजारा और जयपुर तक के वाहनों के लिए महत्वपूर्ण है। यहां बाजारों और कार्यालयों तक पहुंचने के लिए लिंक रोड का इस्तेमाल होता है, जिससे वाहन संख्या में वृद्धि होती है। गौरव पथ के जेल सर्किल से कटीघाटी तक स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रणाली को लागू कर ट्रैफिक को और अधिक सुचारु बनाने की योजना है।

इसके अलावा, सामान्य अस्पताल के बाहर अतिक्रमण की स्थिति भी गंभीर है। नगर निगम द्वारा यहाँ लगे दर्जनों ठेलों को कई बार हटाया गया है, लेकिन वे फिर वहीं लग जाते हैं। ठेले स्लिप लेन में खड़े होते हैं, जो यातायात के लिहाज से उचित नहीं है। नगर निगम द्वारा मॉनिटरिंग न होने के कारण यह समस्या लगातार बनी हुई है। इस परिस्थिति को देखते हुए ठेलों को दूसरी जगह स्थानांतरित करना जरूरी बताया जा रहा है।

ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन कराना और अतिक्रमण हटाना यूआइटी की प्राथमिकता है, ताकि शहर की सड़कों पर वाहन आसानी से चल सकें और आम नागरिकों को भी राहत मिल सके। आने वाले सप्ताहों में इन कार्यों के परिणाम देखे जाएंगे और ट्रैफिक की स्थिति में सुधार अपेक्षित है।

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