आचार्य पुलकसागर ने भीलवाड़ा को 2026 के चातुर्मास का आश्वासन दिया

भीलवाड़ा, राजस्थान। वस्त्रनगरी भीलवाड़ा के लिए एक अत्यंत हर्षवृत्तांत सामने आया है, जहां प्रखर वक्ता आचार्य पुलकसागर ने वर्ष 2026 में अपने चातुर्मास के लिए शहर को आश्वस्त किया है। यह खबर नगर के धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में विशेष उल्लास का कारण बनी हुई है।
मंगलवार को सलूंबर में सकल दिगंबर जैन समाज भीलवाड़ा के प्रतिनिधिमंडल ने आचार्य पुलकसागर के चरणों में श्रीफल भेंट कर चातुर्मास का निवेदन किया। आचार्य ने समाज की विनती को स्वीकार करते हुए अपने चातुर्मास के लिए पूर्ण आश्वासन दिया। इस अवसर पर समाज के अनेक प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया और इस महत्वपूर्ण क्षण को यादगार बना दिया।
चातुर्मास, जैन और हिंदू धर्म दोनों में एक महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार माना जाता है, जिसमें साधु-संत चार माह तक एक स्थान पर रहकर धार्मिक अनुष्ठान और त्याग के द्वारा समाज को आध्यात्मिक संदेश देते हैं। आचार्य पुलकसागर की उपस्थिति और मार्गदर्शन से भीलवाड़ा की धार्मिक गरिमा बढ़ेगी और युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता बढे़गी, ऐसा विश्वास समाज के लोगों को है।
भीलवाड़ा के नागरिक इस बात से प्रसन्न हैं कि आचार्य पुलकसागर जैसे धर्मगुरु का निवास उनके शहर में होगा। इससे न केवल धार्मिक क्रियाकलापों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और पर्यटन क्षेत्र में भी प्रभावी परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
आचार्य पुलकसागर की योजना के अनुसार, वर्ष 2026 के चातुर्मास के दौरान अनेक प्रवचन, उपदेश और सामाजिक कार्यों का आयोजन होगा, जिससे धार्मिक अनुशासन के साथ-साथ समाज के उत्थान में भी सहायता मिलेगी। इस दौरान साधु-संतों का विभिन्न सामाजिक विषयों पर मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आचार्य के आश्वासन के पश्चात् भीलवाड़ा के धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने इस आयोजन की व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि वे आचार्य के आगमन तक सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करेंगे। इस महत्वपूर्ण अवसर पर शहरवासियों का उत्साह चरम पर है और वे आचार्य की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
यह आयोजन न केवल भीलवाड़ा के समृद्ध धार्मिक इतिहास को और मजबूती देगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यहाँ के लोगों को आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्य सुदृढ़ करने में भी सहायक होगा।




