डूंगरपुर

GGTU बांसवाड़ा: राज्यपाल के साथ अधिकारी कुर्सी पर बैठे, भाजपा विधायक को खड़ा रहना पड़ा; नाराज आदिवासी नेता का दावा

बांसवाड़ा, राजस्थान। गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (GGTU) बांसवाड़ा में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उच्च स्तरीय अधिकारी और विभिन्न राजनैतिक प्रतिनिधि भी मौजूद थे। हालांकि, संगोष्ठी के बाद हुए ग्रुप फोटो सेशन का एक वायरल हुआ फोटो विवाद का कारण बन गया है।

ग्रुप फोटो में देखा गया कि राज्यपाल और अन्य अधिकारी आरामदायक कुर्सियों पर बैठे थे, जबकि भाजपा के एक विधायक को खड़े रहना पड़ा। इसके विरोध में मौके पर मौजूद आदिवासी नेताओं ने नाराजगी जताई और इसे आदर की कमी माना। आदिवासी नेताओं ने इस स्थिति को उनके प्रति सम्मान की अवहेलना बताया और कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में सभी अतिथियों और प्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।

गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के अधिकारीयों ने बताया कि इस फोटो के बैकग्राउंड में व्यवस्था और समय प्रबंधन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। अधिकारियों ने विवाद पर चुप्पी साधते हुए कहा कि अगली बार सभी के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी।

स्थानिक मीडिया और सामाजिक प्लेटफार्मों पर यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे राजनीतिक दलों के बीच विवाद और भी गहरा गया है। भाजपा विधायक के समर्थक इसे भावनात्मक मामला बता रहे हैं, वहीं भाजपा विरोधी दल इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे आयोजनों में सभी प्रतिभागियों के प्रति समान सम्मान और व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इससे सामाजिक एकता और सामूहिक हितों को बढ़ावा मिलता है।

इस घटना ने गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय की छवि पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि वे इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए समुचित उपाय करें ताकि भविष्य में किसी भी अतिथि या प्रतिनिधि को ऐसा अनुभव न हो।

राष्ट्रीय संगोष्ठी में साझा किए गए विषयों और चर्चा में सामाजिक समरसता व विकास पर जोर दिया गया था, लेकिन इस फोटो विवाद ने चर्चा को एक ओर ध्यान में खींच लिया। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि सार्वजनिक आयोजनों में सम्मान और शिष्टाचार का पालन कितना महत्वपूर्ण होता है।

आगे के विकास के लिए स्थानीय प्रशासन और विश्वविद्यालय दोनों स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं कि विवाद को जल्द शांत किया जाए और सभी पक्षों के बीच संवाद कायम हो सके।

यह मामला आदिवासी समाज में भी व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है, जो भविष्य में कह सकता है कि ऐसे मुद्दों को हल करने के लिए संवेदनशीलता और समझदारी की कितनी आवश्यकता है।

Related Articles

Back to top button