सरिस्का वनपाल ने वन चौकी के कमरे में फंदा लगाकर दी मौत

अलवर, राजस्थान। राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का बफर बाघ परियोजना के तहत आने वाली उमरैण रेंज की वन चौकी से मंगलवार सुबह एक दुखद और सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई। यहां तैनात वनपाल अखिलेश डूडी (45) का शव उनके ही कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
हालांकि मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे से शराब के खाली पत्ते भी बरामद किए हैं, जिससे प्रारंभिक तौर पर यह संकेत मिलते हैं कि वनपाल ने किसी मानसिक अवसाद में यह कदम उठाया हो सकता है। पुलिस सभी एंगल से मामले की जांच कर रही है और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अखिलेश डूडी कई वर्षों से सरिस्का बफर क्षेत्र में वनपाल के रूप में तैनात थे और अपनी ड्यूटी में निष्ठावान माने जाते थे। उन्होंने बताया कि डूडी को वन जीवन और बाघ परियोजना को लेकर विशेष रूप से समर्पित समझा जाता था। विभागीय स्तर पर इस घटना को गंभीरता से लिया गया है और प्रभावित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।
वन क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए काम कर रहे कर्मचारी अपनी दिनचर्या में अनेक तनावों और चुनौतियों का सामना करते हैं। अक्सर दूर-दराज के वन क्षेत्रों में काम करते हुए वनकर्मी मानसिक दबाव और अलगाव महसूस करते हैं, जो इस प्रकार की घटनाओं का कारण बन सकता है।
इस मामले में पुलिस ने कहा है कि फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है और जांच के दौरान शव पर किसी भी बाहरी चोट या आघात के संकेत नहीं मिले हैं। सभी संभावित वजहों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों और वन विभाग के कर्मचारियों ने इस घटना पर गहरा शोक जताते हुए बताया कि अखिलेश डूडी एक मिलनसार और मेहनती कर्मचारी थे। उनकी अचानक मौत ने पूरे विभाग को सदमे में डाल दिया है।
यह घटना वन क्षेत्र के कर्मचारियों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर भी उठाए जाने वाले सवालों को सामने लाती है और जरूरी है कि वन विभाग इन मुद्दों पर विशेष ध्यान दे। वनकर्मियों के लिए नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच और सहायता व्यवस्था की शुरुआत कर इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को कम किया जा सके।
इस दुखद घटना ने न केवल परिवार और सहकर्मियों को मातम में डाला है, बल्कि वन क्षेत्र की सुरक्षा और देखरेख करने वाले अन्य कर्मचारियों के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले की तह तक जाकर उचित कार्रवाई करने और जरूरतमंदों को शीघ्र सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।
सरिस्का की यह घटना वनकर्मियों के तनावपूर्ण जीवन पर भी एक गंभीर नजरिया प्रस्तुत करती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए विभागीय नीतियों में आवश्यक बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित करती है।




