अगर बच्चों को आउटडोर खेल खेलने का मौका नहीं मिलेगा तो उनकी आंखें कमजोर हो सकती हैं

दौसा, राजस्थान – खराब खानपान, अधिक स्क्रीन टाइम और आउटडोर खेलों की कमी के कारण बच्चों की नजर कमजोर होती जा रही है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में हाल ही में आयोजित आई स्क्रिनिंग कार्यक्रम के आंकड़ों से यह चिंता बढ़ाने वाला तथ्य सामने आया है।
राजस्थान में पिछले चार वर्षों में रिफ्रेक्टिव एरर से ग्रसित विद्यार्थियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। इस अवधि के दौरान यह आंकड़ा 7.25 फीसदी से बढ़कर 9.21 फीसदी तक पहुंच गया है, जिसका मतलब है कि हर 100 में से लगभग 10 बच्चे नजर संबंधी समस्याओं से प्रभावित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों का खराब खानपान, मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों पर ज्यादा समय बिताना, तथा आउटडोर खेलों और शारीरिक गतिविधियों की कमी इससे सीधे जुड़ी हुई हैं। लगातार स्क्रीन के सामने बैठने से आंखों पर दबाव बढ़ता है जो दृष्टि दोषों को जन्म देता है।
सरकारी स्वास्थ्य विभाग ने आई स्क्रिनिंग से मिली रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए प्रदेशभर के स्कूलों में बच्चों की नेत्र जांच अभियान तेज करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही बच्चों को समय-समय पर बाहरी खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि उनकी सीखने की क्षमता और स्वास्थ्य पूरी तरह से सुरक्षित रह सके।
माता-पिता और शिक्षक भी अब इस दिशा में सक्रिय हो रहे हैं और बच्चों को संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों की दृष्टि की रक्षा के लिए बचपन से ही सही आदतें अपनाना आवश्यक है क्योंकि युवावस्था में नजर की समस्याओं का इलाज कठिन हो सकता है।
आगे भी इस विषय पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि नौनिहालों की आंखों की सेहत सुधर सके और वे तकनीकी युग की चुनौतियों का सामना स्वस्थ दृष्टि के साथ कर सकें।




