आजादी के 75 वर्षों बाद भी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी बरकरार

नागौर, राजस्थान। आज़ादी के 75 वर्षों के बाद भी नागौर जिले के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से मजबूत नहीं हो सकी हैं। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर अस्पतालों में चिकित्सकीय सुविधाओं की वर्तमान स्थिति का जायजा लेने पर यह स्पष्ट हुआ कि अभी भी डॉक्टरों और आवश्यक संसाधनों की भारी कमी जमीनी हकीकत बनी हुई है।
जिले में करीब 33 प्रतिशत चिकित्सक पद अभी तक खाली हैं। इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलने में बाधा हो रही है। इसके अलावा नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ की कमी ने भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रभाव डाला है। इस कमी के कारण कई बार मरीजों को उचित समय पर इलाज नहीं मिल पाता है, जिससे उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
सरकारी अस्पतालों में आधुनिक उपकरण और दवाइयों की उपलब्धता भी संतोषजनक नहीं है। नतीजतन, मरीजों को बेहतर सेवाएं प्राप्त करने के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जो आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के लिए हमेशा संभव नहीं होता। स्थानीय प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने के कई दावे किए गए हैं, लेकिन जमीन पर इसका असर सीमित ही दिख रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र और प्रभावी बनाना जरूरी है। साथ ही अस्पतालों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बजट आवंटन बढ़ाने की आवश्यकता है। इससे न केवल मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी सरकारी अस्पतालों की साख मजबूत होगी।
नागौर जिले के स्वास्थ्य विभाग ने कुछ सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है, लेकिन उन्हें तेजी से लागू करना होगा ताकि आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती सुनिश्चित की जा सके। नागरिक भी इस दिशा में प्रशासन की मदद कर सकते हैं और सामाजिक जागरुकता बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।




