भीलवाड़ा में डीजीपी ने आइपीएस के खिलाफ जांच शुरू की

भीलवाड़ा, राजस्थान: जिले के कोटड़ी थाना क्षेत्र में अवैध गारनेट (रेत का सोना) के काले कारोबार से जुड़ी अवैध वसूली का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में एक गिरोह आरोपित है जो अवैध रूप से गारनेट माफिया से वसूली करता था। पुलिस ने शनिवार रात को कोटड़ी थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
कोटड़ी थाना पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनसे अवैध वसूली का गंभीर आरोप जुड़ा है। इस मामले में आइपीएस अधिकारी और सदर पुलिस उपाधीक्षक माधव उपाध्याय की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जिससे जांच की मांग उठी।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आइपीएस उपाध्याय के खिलाफ जांच बैठा दी है। मामले की जांच जीआरपी अजमेर के पुलिस अधीक्षक करेंगे ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।
मामले में पकड़ा गया एक आरोपी जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के नजदीकी के रूप में पहचाना गया है, जो इस काले कारोबार में शामिल है। यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि अवैध रेत के व्यापार के साथ पुलिस अधिकारियों के कथित संधिग्ध सहयोग की बात सामने आई है।
अवैध गारनेट व्यापार के कारण न केवल प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि इससे जुड़ी अवैध वसूली और भ्रष्टाचार भी बढ़ रहा है। इस प्रकार की घटनाएं कानून व्यवस्था को चुनौती देती हैं और जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं।
कोटड़ी पुलिस का कहना है कि अग्रिम जांच जारी है और दोषियों को कड़ाई से समुचित दंड मिलेगा। डीजीपी की जांच टीम भी जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिससे मामले की सच्चाई पूरी तरह सामने आएगी।
स्थानीय नागरिक इस जांच से आशान्वित हैं कि इससे क्षेत्र में व्याप्त अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी और कानून व्यवस्था बेहतर होगी। प्रशासन ने कहा है कि कोई भी पुलिस अधिकारी या अन्य संबंधित व्यक्तियों को कानून के बाहर नहीं रखा जाएगा।
यह मामला भीलवाड़ा में अवैध खनन और उससे जुड़े अपराधों के प्रति जुड़वां ध्यान देने का उदाहरण है, जहां उच्च स्तर पर कार्रवाई कर स्थिति सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।




