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ब्यावर में बन रही 2 सिक्स लेन रोड, आठ माह में पूरा होगा काम, 311 पेड़ों की कटाई पर फैसला बाकी

ब्यावर, राजस्थान: ब्यावर में सतपुलिया से देलवाड़ा रोड बाइपास तक तथा बस स्टैंड से अजगर बाबा थान तक दो महत्वपूर्ण सिक्स लेन सड़कों का निर्माण कार्य जोरों पर है। यह परियोजना आसपास के क्षेत्रों के यातायात प्रबंधन को सरल बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है और स्थानीय निवासियों के लिए आवागमन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है।

परंतु इस विशाल सड़क निर्माण के दौरान कुल 311 पेड़ जद में आ रहे हैं, जिन्हें काटने की आवश्यकता पड़ सकती है। इस संबंध में सार्वजनिक निर्माण विभाग ने तहसीलदार को आधिकारिक पत्र भेजा है। तहसीलदार ने इस प्रस्ताव को जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। अब पेड़ों की कटाई के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मिलने का इंतजार है। अनुमति मिलने के बाद ही पेड़ों की कटाई की जाएगी ताकि पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन हो सके।

स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों के बीच पेड़ कटाई को लेकर चिंता व्याप्त है। कई लोग पूरी सड़क परियोजना की आवश्यकता को तो समझते हैं, लेकिन अनुरोध कर रहे हैं कि पेड़ों की कटाई के स्थान पर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि पेड़ों का शहर में ऑक्सीजन स्रोत के रूप में अहम योगदान होता है और इनकी कटाई से वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

दूसरी ओर जिला प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर पेड़ों की कटाई को न्यूनतम करने और पर्यावरण संरक्षण के उपायों को सर्वोच्चता देने की प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही पेड़ काटे जाने पर समुचित पुनर्निर्माण व वृक्षारोपण कार्य भी किया जाएगा।

प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए लगभग आठ माह का समय निर्धारित किया गया है और अपेक्षा है कि निर्धारित समय के भीतर सडक़ निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। यह सड़क परियोजना ब्यावर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को बढ़ावा देगी।

इस दिशा में आगे बढ़ते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम लोगों से संयम और सहयोग की अपील की है ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।

इस प्रकार, ब्यावर में बन रही सिक्स लेन सड़क परियोजना विकास के साथ पर्यावरणीय संवेदनशीलता का उदाहरण प्रस्तुत करती नजर आ रही है, जहां आधुनिकता और प्रकृति के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के प्रयास हो रहे हैं।

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