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ताल छापर : प्रकृति के सुरों से रूबरू हुए ग्रैमी अवार्ड विजेता रिकी केज, तालछापर की खूबसूरती से मंत्रमुग्ध

छापर, राजस्थान – तालछापर अभयारण्य की शांत और प्राकृतिक सुंदरता ने शनिवार को एक खास अनुभव दिया, जब विश्वप्रसिद्ध भारतीय संगीतकार और तीन बार के ग्रैमी अवार्ड विजेता रिकी केज पहली बार यहां पहुंचे। पर्यावरण के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रेम ने इस यात्रा को विशेष बना दिया।

रिकी केज ने तालछापर की जैव विविधता का करीब से निरीक्षण किया। उन्होंने प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ वातावरण में मौजूद काले हिरणों के झुंडों का ध्यानपूर्वक अवलोकन किया। उनके साथ आये विशेषज्ञों ने देशी और विदेशी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इस अभयारण्य में पाए जाने वाले रेप्टाइल्स और दुर्लभ वनस्पतियों को देखा और समझा गया।

रिकी केज ने कहा, “तालछापर भारत के सबसे खूबसूरत अभयारण्यों में से एक है। यहां की प्राकृतिक छटा और शांति ने मुझे भीतर से छू लिया। यह स्थान पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक आदर्श उदाहरण है।” उनकी यात्रा ने इस अभयारण्य के महत्व को और भी बढ़ा दिया है, खासकर जब वे प्रकृति प्रेमी और ग्लोबल संगीत जगत के प्रतिष्ठित हस्ती हैं।

तालछापर अभयारण्य, जो राजस्थान के जैव विविधता संरक्षण के लिए जाना जाता है, अपनी अनोखी पारिस्थितिकी और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों और शोधकर्ताओं के बीच लोकप्रिय है। यहां के काले हिरण और पक्षियों की विविधता इसकी खास पहचान है। इस अभयारण्य से जुड़े स्थानीय लोग भी रिकी केज के इस दौरे को गर्व की बात मान रहे हैं।

प्रकृति की गोद में रिकी केज का यह अनुभव न केवल एक संगीतकार के लिए यादगार रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी मजबूती प्रदान करता है। यह आयोजन दिखाता है कि कैसे कला और प्रकृति मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

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