कृषि उपज मंडी में लैब की खराबी से किसान बेहाल, जांच में हो रही देरी

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। कृषि उपज मंडी में लैब के खराब होने को लेकर किसानों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। मंडी प्रशासन की ओर से जांच प्रक्रिया में हो रही देरी ने किसानों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। पिछले कुछ समय से दो बार किसानों ने इस समस्या को मुख्यमंत्रालय स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
किसान एसोसिएशन के अध्यक्ष रामनिवास यादव ने बताया कि मंडी में मौजूद लैब की हालत इतनी दयनीय है कि कई बार जांच रिपोर्ट आने में हफ्तों लग जाते हैं। कभी लैब पूरी तरह बंद रहती है, तो कभी उपकरण खराब होने के कारण जांच में विघ्न उत्पन्न होते हैं। इससे कृषि उपज की बिक्री प्रभावित हो रही है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंडी प्रशासन के अधिकारी राजेश चंद्र ने कहा, “हमें समस्या की जानकारी है और हम जल्द ही नई लैब इंस्टालेशन और पुराने उपकरणों की मरम्मत पर काम कर रहे हैं। लेकिन, प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है। हम किसानों की परेशानियों को समझते हैं और उन्हें जल्द से जल्द समाधान प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं।”
किसानों का कहना है कि वे लगातार मंडी प्रशासन से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ किसानों ने तो चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे बड़े पैमाने पर संगठन बनाकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उपज मंडी में गुणवत्ता जांच के लिए लैब का सही समय पर काम करना अत्यंत आवश्यक है। इससे किसानों को सही मूल्य मिलने में मदद मिलती है और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होती है। अगर लैब की समस्याओं को समय पर नहीं सुधारा गया तो इससे पूरे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इसलिये आवश्यक है कि राज्य सरकार और मंडी प्रशासन मिलकर किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र समाधान निकालें। किसानों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे, इसके लिए तकनीकी और व्यवस्थागत सुधार आवश्यक हैं।
किसानों की बढ़ती हुई नाराजगी को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि आगामी कुछ दिनों में प्रशासन सक्रियता दिखाएगा और लैब की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालेगा ताकि किसान बिना किसी बाधा के अपनी उपज मंडी में बेच सकें।



