किसान बन सकते हैं मालामाल: महज 4 बीघा से 15 लाख की स्ट्रॉबेरी फसल

दौसा, राजस्थान। श्याम विश्वविद्यालय, दौसा ने खेती के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी है। विश्वविद्यालय के परिसर में मात्र 4 बीघा भूमि पर आधुनिक तकनीकों के साथ स्ट्रॉबेरी की उन्नत खेती का सफल मॉडल तैयार किया गया है, जिससे किसानों को खेती में नए अवसर और बेहतर आय के रास्ते दिख रहे हैं। इस कृषि प्रयोग से विश्वविद्यालय ने साबित कर दिया है कि पारंपरिक खेती के अलावा नई फसलों और तरीकों को अपनाकर किस तरह आर्थिक रूप से मजबूत हासिल किया जा सकता है।
स्ट्रॉबेरी की इस खेती से लगभग 15 लाख रुपए की उपज होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे यह मॉडल छोटे और मध्यम किसानों के लिए काफी प्रेरणादायक सिद्ध हो सकता है। श्याम विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान विभाग ने इसमें आधुनिक तकनीक जैसे ड्रिप इरिगेशन, पोषक तत्व प्रबंधन, और पर्यावरण अनुकूल खेती के तरीकों को अपनाया है, जिससे उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ गुणवत्ता भी बेहतर हुई है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रॉबेरी जैसी फलदार फसलें पारंपरिक अनाज की तुलना में अधिक लाभदायक होती हैं, बशर्ते कि उसे वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर उगाया जाए। श्याम विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि “हमने इस प्रयोग में मिट्टी परीक्षण से लेकर जल प्रबंधन तक प्रत्येक चरण को ध्यानपूर्वक नियंत्रित किया है, जिसका परिणाम हमारी उम्मीदों से भी बेहतर रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि यह मॉडल ग्रामीण किसानों के लिए एक सशक्त विकल्प साबित हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां परंपरागत फसलों की पैदावार कम होती है।
संबंधित अधिकारियों का कहना है कि इस सफलता को देखते हुए भविष्य में और भी किसानों को इस तकनीक से विकसित स्ट्रॉबेरी खेती से जोड़ा जाएगा। सरकार द्वारा भी इस दिशा में अनुदान और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि किसानों को आधुनिक तकनीकें अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिले।
दौसा जिले के स्थानीय किसानों ने भी इस प्रयोग की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से श्याम विश्वविद्यालय ने 4 बीघा में उच्च गुणवत्ता वाले स्ट्रॉबेरी उत्पादन का मॉडल तैयार किया है, वह ग्रामीण किसान समुदाय के लिए आय के नए स्रोत खोल सकता है। “हमारा मानना है कि यदि इस खेती को लेकर सही मार्गदर्शन और सुविधाएं मिलेंगी तो हम जल्द ही अपने खेतों में भी इस फसल को उगाकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगे,” एक किसान ने बताया।
इस पहल ने साबित कर दिया है कि खेती के क्षेत्र में नवाचार लाकर आर्थिक समृद्धि हासिल की जा सकती है। श्याम विश्वविद्यालय ने न केवल नई तकनीकों को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है, बल्कि ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी एक मिसाल कायम की है। आने वाले समय में इस मॉडल को और अधिक किसानों तक पहुंचाकर खेती की गुणवत्ता और आय को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है।
कुल मिलाकर, दौसा के श्याम विश्वविद्यालय द्वारा शुरू की गई यह स्ट्रॉबेरी कृषि पहल किसानों के लिए प्रेरणा के साथ-साथ आर्थिक अवसरों का नया द्वार खोलती है, जो कृषि की परंपरा में नई तरक्की की कहानी लिखने जा रही है।




