राजनीतिक विवाद में फंसा बहुद्देश्यीय पशु चिकित्सालय, जनता देख रही तमाशा, जमीन आज भी अतिक्रमण में

राजसमंद, राजस्थान। धोइंदा क्षेत्र में प्रस्तावित बहुद्देश्यीय पशु चिकित्सालय का निर्माण कार्य अत्यंत धीमी गति से प्रगति कर रहा है, जो अब विकास की कहानी कम और राजनीति के अखाड़े में ज्यादा तब्दील हो चुका है। करीब कई वर्षों से चली आ रही इस योजना की जमीन पर आज भी अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है, जिससे पशु चिकित्सालय का निर्माण बाधित हो रहा है।
यह चिकित्सालय कांग्रेस शासनकाल में स्वीकृत हुआ था। उस समय इसे धोइंदा में स्थापित किया जाना तय था, लेकिन 2021 में राजनीतिक फैसलों के तहत इसे नाथद्वारा स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले ने स्थानीय लोगों में असंतोष और विवाद को जन्म दिया है। धोइंदा के निवासियों का आरोप है कि इस स्थानांतरण से उनकी सुविधाओं को नुकसान होगा, जबकि पक्षकार इसे बेहतर संसाधनों और पहुंच के लिए आवश्यक कदम बता रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन और राजकीय अधिकारियों के बीच भी इस मामले को लेकर गतिरोध देखी जा रही है। महकमे के उच्चाधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है, लेकिन राजनीतिक दबाव एवं जटिलताओं के कारण कार्रवाई धीमी पड़ गई है। इस कृषि प्रधान क्षेत्र में पशु चिकित्सालय की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि स्थानीय किसानों और पशुपालकों की दिन-प्रतिदिन की समस्याओं का समाधान यहां से संभव हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पशु चिकित्सालय की जमीन पर चल रहे अतिक्रमण को हटाना और निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करना आवश्यक है ताकि इस क्षेत्र के पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके। वहीं, राजनीतिक दल भी इस मामले को चुनावी मुद्दा बनाए हुए हैं, जिससे समाधान और भी दूर होता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि वे राजनीतिक खेल को परे रखकर विकास कार्यों को प्राथमिकता दें। उनका कहना है कि पशु चिकित्सालय ना सिर्फ पशु स्वास्थ्य के लिए बल्कि क्षेत्र की समग्र विकास प्रक्रिया के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। इस प्रस्तावित योजना की सफलता के लिए सभी पक्षों का सहयोग बेहद जरूरी है ताकि धोइंदा और आसपास के इलाकों के लोग लंबे इंतजार के बाद इस सुविधा का लाभ उठा सकें।




