राजस्थान स्कूल: सीएसजी पर शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, स्कूलों के संस्था प्रधान हैरान, अब क्या करें

जयपुर, राजस्थान। समग्र शिक्षा अभियान के तहत राजकीय विद्यालयों को दी जाने वाली कम्पोजिट स्कूल ग्रांट (सीएसजी) को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता का अंत हो गया है। राजस्थान पत्रिका द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सत्र 2025-26 के अंतिम चरण में सीएसजी जारी कर दी है। यह फैसला शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास के तौर पर देखा जा रहा है।
कम्पोजिट स्कूल ग्रांट (सीएसजी) का उद्देश्य था कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के राजकीय स्कूलों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान करके उनके इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया जा सके तथा शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सके। पिछले कई माह से शिक्षा विभाग की ओर से ग्रांट में देरी के कारण विद्यालयों के संस्था प्रधान एवं शिक्षकों में असमंजस की स्थिति थी, जिसे लेकर कई बार स्कूलों ने शिकायत भी की थी। इससे बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की दैनिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा था।
राजस्थान पत्रिका ने इस गंभीर समस्या को बार-बार उठाया और शिक्षा विभाग से जवाब मांगा। इस दबाव के बाद शिक्षा विभाग ने अब तक लंबित पड़ी राशि का वितरण शीघ्रता से पूर्ण किया है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राशि का वितरण सत्र 2025-26 के अंत तक सुनिश्चित कर दिया गया है ताकि अगले सत्र में विद्यालयों की पढ़ाई और व्यवस्थाओं में कोई बाधा न आए।
स्कूलों के संस्था प्रधानों ने इस फैसले का स्वागत किया है लेकिन वे अब भी भविष्य में ऐसी अनिश्चितताओं से बचने हेतु विभाग से समय पर वित्तीय सहायता जारी करने की मांग कर रहे हैं। कुछ प्रधानों ने कहा कि वे अब धनराशि मिल जाने के बाद स्कूल में आवश्यक मरम्मत कार्य और नए शिक्षण उपकरणों की खरीदारी शुरू कर देंगे।
शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि भविष्य में सीएसजी के वितरण को और पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए नई व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इससे राजकीय स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण वातावरण प्राप्त होगा।
इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के हजारों विद्यालयों और उनके शिक्षक तथा छात्र लाभान्वित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभाग समय पर संसाधन मुहैया कराता रहा तो शिक्षा के क्षेत्र में यह कदम शिक्षा के स्तर को और ऊँचा उठाएगा।
राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जहां अब स्कूल और संस्था प्रधान राहत की सांस ले सकते हैं। सत्र 2025-26 के अंतिम चरण में मिली सीएसजी राशि का सदुपयोग कर बेहतर विद्यालयी वातावरण बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस प्रकार लंबे समय से चली आ रही छाया जैसी अनिश्चितता खत्म होकर राजस्थान के सरकारी स्कूलों को आवश्यक वित्तीय संरक्षण मिला है, जो आगे के शिक्षण कार्यों को सुदृढ़ बनाएगा।




