जयपुर

सरसों में फिर छाया राजस्थान: किसानों की मेहनत रंग लाई, रबी सीजन में रिकॉर्ड बढ़त से बना नंबर-1

जयपुर, राजस्थान – राजस्थान एक बार फिर देश में सरसों उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। 2025-26 के रबी सीजन में राज्य ने सरसों की बंपर पैदावार से अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि इस बार पूरे देश में सरसों का उत्पादन 119.4 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें राजस्थान का योगदान सबसे प्रमुख होगा।

रबी की फसलों में सरसों का खास महत्व होता है, और राजस्थान के किसानों की मेहनत इस बार भी रंग लाई है। पिछले कई वर्षों से राज्य में सरसों की पैदावार लगातार बढ़ रही है, जिससे यहां के किसान और प्रदेश की अर्थव्यवस्था दोनों को बल मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर बीज, नई तकनीक, सिंचाई सुविधाओं और सरकारी समर्थन के कारण किसान अधिक उत्पादकता हासिल कर पा रहे हैं।

राजस्थान सरकार द्वारा किसानों के लिए लागू की गई कई योजनाएं जैसे कि सरकारी सब्सिडी, उचित मूल्य पर बीज वितरण, और बेहतर बाजार व्यवस्था ने भी इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा, जल संरक्षण और सतत कृषि विधियों को अपनाकर किसान उत्पादन को बढ़ाने में सक्षम हुए हैं।

सरसों न केवल तेल की जरूरत को पूरा करता है, बल्कि इसके उत्पादन से जुड़े कई छोटे उद्योग भी राज्य में विकास कर रहे हैं। स्थानीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देते हुए सरसों की बढ़ती पैदावार रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा रही है। रबी सीजन में यह बड़े पैमाने पर किसानों की आमदनी में वृद्धि का आधार बना है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि राजस्थान की यह उपलब्धि देश में खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले वर्षों में यदि इसी प्रकार की प्रगति जारी रही तो राजस्थान और अधिक कृषि उत्पादक प्रदेश के रूप में उभर सकता है। সরকার और किसानों को भी इस सफलता को कायम रखने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना होगा।

सरसों उत्पादन में राजस्थान का यह दबदबा बताता है कि राज्य ने कृषि क्षेत्र में जो सुधार और पहल की हैं, वे सफल रही हैं। इससे न केवल किसानों का मान बढ़ा है, बल्कि रबी सीजन में पूरे देश की आर्थिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

कुल मिलाकर, राजस्थान ने इस रबी सीजन में सरसों की पैदावार के मामले में जो शानदार प्रदर्शन किया है, वह राज्य की कृषि विकास यात्रा में एक गौरवशाली अध्याय के रूप में याद रखा जाएगा।

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