कैलादेवी धाम में चैत्र लक्खी मेला प्रारंभ, 50 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान

करौली, राजस्थान। राजस्थान के करौली जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ कैलादेवी मंदिर में सोमवार से चैत्र मास का शुभ और पावन लक्खी मेला शुरू हो गया है। इस मेले की शुरुआत होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता कैलादेवी के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में पहुंचने लगे।
कैलादेवी मंदिर का यह लक्खी मेला प्रति वर्ष चैत्र मास में आयोजित होता है और देश-विदेश से लाखों भक्त इसमें सम्मिलित होते हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने इस बार भी सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा इंतजाम किया है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मेला 16 मार्च से 1 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र को सजीव और भक्तिपूर्ण वातावरण से भरपूर देखा जा रहा है। मेले में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो श्रद्धालुओं के बीच उत्साह भर देते हैं।
मंदिर अधिकारी बताते हैं कि इस बार लगभग 50 लाख श्रद्धालु इस मेले में भाग लेने का अनुमान है। इस भारी भीड़ को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से चौकसी बढ़ा दी गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं और कोविड-19 के नियमों का भी पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
स्थानीय दुकानों में पूजा सामग्री, धार्मिक किताबें, मिठाइयां और अन्य वस्तुओं की बिक्री हो रही है, जो मेले के माहौल को और भी जीवंत बनाती हैं। मेले के दौरान घर-घर में लक्खी माता की आराधना एवं विशेष पूजा की जाती है, जिससे भक्तों का आस्था और विश्वास और भी प्रगाढ़ होता है।
इस वर्ष का कैलादेवी लक्खी मेला पिछले वर्षों की तरह ही श्रद्धा और उत्साह का केंद्र बना हुआ है। आसपास के गांव और कस्बों से बड़ी संख्या में लोग पैदल यात्रा कर मेले में सम्मिलित हो रहे हैं। प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया है ताकि आने-जाने में किसी तरह की बाधा न हो।
भक्तों का मानना है कि कैलादेवी माता की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इसलिए वे कठिन यात्रा तय कर भी इस पावन स्थल पर आते हैं। मेला स्थान पर लंगर और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे श्रद्धालु बिना किसी समस्या के अपनी यात्रा का आनंद ले पाते हैं।
कैलादेवी लक्खी मेला धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आयोजन है, जो क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को भी बढ़ावा देता है। इस मेले ने साल-दर-साल अपनी गरिमा और प्रभाव बढ़ाया है और यह भविष्य में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहेगा।




