हनुमानगढ़: ‘डिजिटली फूल’ बनाकर बढ़ रही फिजूल भागदौड़, प्रैंक्स और फेक खबरें फैला रही अफरा-तफरी

हनुमानगढ़, राजस्थान: सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव आज के दौर में न केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान का माध्यम बन चुका है, बल्कि कई बार इसका दुरुपयोग भी देखा जा रहा है। एक समय था जब एक अप्रैल का दिन केवल हल्के-फुल्के मजाक के लिए जाना जाता था, मगर आज सोशल मीडिया पर प्रैंक्स और झूठी खबरें फैलाना आम बात हो गई है। इस डिजिटल युग में ‘‘डिजिटली फूल’’ बनाकर गलत सूचनाओं को तेजी से फैलाना एक बड़ी समस्या बन चुका है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप आदि पर प्रैंक्स और झूठी सूचनाएँ तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है और अफरा-तफरी फैलती है। अधिकतर लोग किसी मजाक या शरारती मंशा से ऐसा करते हैं, जबकि कुछ लोग फेम हासिल करने या विवादित स्थिति पैदा करने के लिए जान-बूझकर फेक न्यूज फैलाते हैं।
हनुमानगढ़ क्षेत्र में भी इस समस्या ने तीव्र रूप ले लिया है। समाज में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहाँ बिना पुष्टि की गई खबरें शेयर करने से सामाजिक सौहार्द्र भंग होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रैंक्स या झूठी खबरें कभी-कभी मानसिक तनाव, भय और असामाजिक गतिविधियों को जन्म देती हैं।
स्थानीय प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को बिना पुष्टि के न फैलाएं और फेक न्यूज को रोके। साथ ही, डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए कई कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं ताकि लोग इन खतरों से बच सकें।
सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने के लिए तकनीकी कंपनियों को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। वे प्लेटफॉर्म्स बनाने वाले हेरफेर और झूठे संदेशों को पहचान कर हटाने के लिए बेहतर एल्गोरिदम और मॉडरेशन सिस्टम को लागू करें, यह आवश्यक बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ सोशल मीडिया का प्रयोग ही इस समस्या का समाधान हो सकता है। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमें फैलाई गई किसी भी खबर की सत्यता का पता लगाकर ही उस पर विश्वास करना चाहिए और असत्य या भ्रामक सूचनाओं को फैलाने से बचना चाहिए।
वनलाइन, डिजिटल दुनिया का सही और जिम्मेदार उपयोग हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है। छोटे-छोटे कदम और सतर्कता से हम ‘‘डिजिटली फूल’’ के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं और सोशल मीडिया को एक सकारात्मक मंच बना सकते हैं।




