चित्तौरगढ़

चित्तौड़गढ़: श्मशान घाट पर भी सुरक्षा नहीं, PPE किट पहनकर अंतिम संस्कार, मधुमक्खी के हमले में 11 घायल

चित्तौड़गढ़, राजस्थान। चित्तौड़गढ़ के पारसोली क्षेत्र के श्मशान घाट पर मधुमक्खियों के अचानक हमले ने स्थानीय लोगों के बीच चिंता और दहशत मचा दी है। इस भयानक स्थिति के कारण परिजनों को अपने प्रियजन की अंतिम यात्रा के दौरान पीपीई किट और हेलमेट पहनने की मजबूरी का सामना करना पड़ा।

पारसोली के श्मशान घाट पर मंगलवार को जब अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं, तभी मधुमक्खियों ने अचानक हमला कर दिया। इस अप्रत्याशित हमले में कम से कम 11 ग्रामीण गम्भीर रूप से घायल हो गए, जिनमें कई को मधुमक्खी के डंक से गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल पारसोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार जारी है।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि मध्यस्थ प्रयासों के बावजूद मधुमक्खियों का झुंड इतना उग्र था कि श्मशान घाट पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करना आवश्यक हो गया। पीपीई किट और हेलमेट का उपयोग कर परिजन अपने प्रियजन को अंतिम संस्कार देने पहुंचे। यह पहली बार नहीं है जब श्मशान घाट जैसे शांत स्थान पर इस प्रकार की घटना हुई हो, लेकिन इस बार की स्थिति पहले से भी ज्यादा भयावह थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में मधुमक्खियों का आशियाना तेजी से फैल रहा है और पर्यावरण असंतुलन के कारण वे अत्यधिक आक्रामक हो गए हैं। साथ ही, श्मशान घाट के आसपास वृक्ष और झाड़-झंखाड़ का होना भी इन मधुमक्खियों के तेज हमला होने की प्रमुख वजह मानी जा रही है। इलाके के कई लोग इस समस्या को लेकर प्रशासन से सतत और प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने बताया कि घायलों में से अधिकांश को मधुमक्खी के डंक लगने के बाद एलर्जी हुई, जिनका तुरंत इलाज किया जा रहा है। प्रशासन ने स्थानीय पुलिस और वन विभाग को इस क्षेत्र में आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने के आदेश दिए हैं। साथ ही, आसपास के गांवों में लोगों को मधुमक्खियों के प्रति सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से श्मशान घाट के आसपास नहीं जाने की हिदायत दी गई है।

यह घटना चित्तौड़गढ़ में पर्यावरण और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर करती है, जहां प्राकृतिक जीवन और मानव गतिविधियों के बीच तालमेल जरूरी है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने मिलकर जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।

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