चित्तौरगढ़

चित्तौड़गढ़: साहब! ‘क्लास’ कम करें, अफीम तुलाई में भावुक किसान और सख्त अधिकारी; खातों में 60 लाख रुपए ट्रांसफर

चित्तौड़गढ़, राजस्थान। मेवाड़ के अफीम उत्पादन के दूसरे दिन तुलाई केंद्रों पर किसानों का उत्साह चरम पर रहा। अफीम जिसे ‘काला सोना’ भी कहा जाता है, उसकी सरकारी खरीद प्रक्रिया में इस बार भी किसानों और अधिकारियों के बीच तौलते समय विभिन्न भावनाओं का संगम देखने को मिला।

मूल्यांकन के दौरान कुछ किसानों ने अपनी अफीम की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों से ‘क्लास’ कम करने की गुहार लगाई, जबकि अधिकारियों ने सख्ती बरतते हुए गुणवत्ता मानकों को बनाए रखा। अफीम की गुणवत्ता पाँचवीं श्रेणी में आने के कारण कई किसान निराश नजर आए, पर अधिकारियों ने नियमों का पालन करते हुए वजन और गुणवत्ता के हिसाब से तौल किया।

तुलाई केंद्रों पर किसानों की भीड़ देखी गई जो अपनी फसल की उचित कीमत मिलने की उम्मीद लेकर आए थे। अधिकारियों ने भी किसानों को आश्वासन दिया कि सरकारी खरीद व्यवस्था पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार ही संचालित की जाएगी। तुलाई के बाद किसानों के खातों में इस बार लगभग 60 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए हैं, जो मेवाड़ के अफीम क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि अफीम की खरीद प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात नहीं होगा। किसानों ने भी अफसरों के इस रवैये को सराहा। एहतियात के तौर पर अफीम की गुणवत्ता जांच के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जा रहे हैं ताकि किसान अपनी उपज का सही मूल्य हासिल कर सकें।

स्थानीय प्रशासन इस प्रक्रिया को और अधिक सुचारू बनाने के लिए ग्रामीणों के साथ लगातार संवाद में है। मेवाड़ क्षेत्र में अफीम की खरीद से जुड़ी यह प्रक्रिया न केवल किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि क्षेत्र की समृद्धि में भी योगदान करती है।

इस खरीद के दौरान चोरी-छिपे या अवैध वस्त्रों के तस्करी को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। प्रशासन के मुताबिक किसानों और अधिकारियों के सहयोग से ही इस खरीदी अभियान को सफल बनाया जा सकता है।

अंततः मेवाड़ के अफीम तुलाई केंद्रों पर यह प्रक्रिया किसानों और अधिकारियों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण लेकिन महत्वपूर्ण साबित हो रही है। आने वाले दिनों में भी अधिकारियों का प्रयास रहेगा कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिले और अफीम उत्पादन क्षेत्र की प्रतिष्ठा बनी रहे।

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