जैसलमेर

बाड़मेर-जैसलमेर में नशे का खतरा बढ़ा, थार में बनीं 7 महीने में 6 सिंथेटिक ड्रग फैक्ट्रियां

बाड़मेर, राजस्थान। राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिले बाड़मेर और जैसलमेर में नशे की घोर समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। जहां पहले तस्करी सीमित स्तर पर होती थी, वहीं अब सुनसान धोरों और ढाणियों में सिंथेटिक ड्रग एमडी (मेफेड्रोन) की अवैध फैक्ट्रियों का खुलासा होना एक बड़े नेटवर्क की मौजूदगी को दर्शाता है। पिछले 7 महीनों में यहां 6 ऐसी फैक्ट्रियां पकड़ी गई हैं, जो इस क्षेत्र में नशे के फैलने की गंभीरता को उजागर करती हैं।

पुलिस और सीमा सुरक्षा बल की संयुक्त कार्रवाई में ये फैक्ट्रियां मुठभेड़ और छापेमारी के दौरान आमने सामने आई हैं। मेफेड्रोन जैसी सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन और वितरण से जुड़े ये रैकेट स्थानीय युवाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं क्योंकि यह नशा पारंपरिक नशों की तुलना में कहीं अधिक नशीला और नुकसानदेह है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि मेफेड्रोन जैसी दवाएं मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमिटर्स को प्रभावित करती हैं और इसके ज्यादा सेवन से मानसिक एवं शारीरिक बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। बाड़मेर और जैसलमेर में ऐसी आपराधिक गतिविधियों की जड़ें गहरी होने की वजह से जिला प्रशासन और पुलिस को अधिक सतर्क रहना होगा।

स्थानीय लोग भी इस समस्या से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि पहले इस क्षेत्र में लोग मुख्यतः भूमिहीन और किसान थे, लेकिन अब नशे की वजह से सामाजिक संरचना प्रभावित हुई है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और युवाओं को जागरूक कर नशे से दूर रखें।

इस क्षेत्र की कठिन भौगोलिक स्थिति और सीमावर्ती होने के कारण नशा तस्करी पर लगाम लगाना चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद पुलिस ने लगातार कार्रवाई करते हुए कई बार बड़ी खेपों को बरामद किया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सिंथेटिक ड्रग फैक्ट्रियों के दोषियों को पकड़ने के लिए विशेष टीम गठित की गई है जो इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए काम कर रही है।

राजस्थान सरकार भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए युवाओं के लिए पुनर्वास कार्यक्रम और शिक्षा के प्रावधान बढ़ा रही है। वहीं, स्थानीय प्रशासन नशे के खिलाफ बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चला रहा है ताकि इस सामाजिक बौर से छुटकारा पाया जा सके।

आगामी महीनों में इस जमीनी समस्या के समाधान पर भी नजर बनी रहेगी क्योंकि थार के रेगिस्तान में फैली ये अवैध फैक्ट्रियां न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे पश्चिमी भारत में नशा संकट की दिशा संकेत करती हैं।

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