भीलवाड़ा

संस्कारों की धरा भीलवाड़ा: बालक सक्षम का सम्यकत्व वर्धन समारोह आदिनाथ मंदिर में

भीलवाड़ा, राजस्थान। वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में धर्म एवं संस्कारों का शानदार संगम देखने को मिला। निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से वर्ष 2016 में जो संस्कारों की पौध रोपी गई थी, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुकी है। इसी शुभ अवसर पर आर.सी. व्यास कॉलोनी निवासी बालक सक्षम झांझरी का सम्यकत्ववर्धन संस्कार भव्यता तथा हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

समारोह की शुरुआत आदिनाथ मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना से हुई, जहां श्रद्धालुओं और परिवारजनों ने उपस्थित होकर संस्कार की महत्ता को रेखांकित किया। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में बताया कि यह संस्कार न केवल बालक के धार्मिक जीवन का आरंभ है, बल्कि समाज में संस्कारों के संरक्षण और संवर्धन का भी संदेश देता है।

सम्यकत्ववर्धन संस्कार का महत्व हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष माना गया है। यह संस्कार बालक को शुद्धता, धर्म, तथा समाज की जिम्मेदारी समझाने का प्रथम चरण होता है। इस अवसर पर परिवार, मित्र तथा समस्त समाज के सदस्य उपस्थित थे जिन्होंने इस पावन संस्कार को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।

भव्य कार्यक्रम में पारंपरिक संगीत, भजन-कीर्तन और धार्मिक उपदेश मुख्य आकर्षण रहे। प्रतिभागियों ने संस्कारों के महत्व और युवा पीढ़ी में संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। इस आयोजन से भीलवाड़ा की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को प्रोत्साहन मिला है।

यह संस्कार सम्पूर्ण समाज के लिए प्रेरक साबित हुआ, जो पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण के साथ आधुनिकता को संतुलित करने का एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है। संस्कारों के इस उत्सव ने भीलवाड़ा को पुनः धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है।

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