भीलवाड़ा

कॉरपोरेट नौकरी छोड़ बने किसान, 7.5 एकड़ में उगा रहे सेहत, सालाना कमा रहे 10 लाख

अमेठी, उत्तर प्रदेश – आधुनिक युग में युवा पीढ़ी खेती से दूर होकर शहरी जीवन की ओर रुख कर रही है, लेकिन इसके विपरीत एक कॉरपोरेट क्षेत्र के दिग्गज त्रिपाठी ने खेती को नई दिशा दी है। लगभग 29 वर्षों तक शीर्ष कॉरपोरेट पदों पर कार्य करते हुए लाखों की आय अर्जित करने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया कि वे अपने पैरों को मिट्टी में मिलाएंगे और प्रकृति के साथ जीवन बिताएंगे।

त्रिपाठी ने अपने 7.5 एकड़ जमीन पर शुद्ध एवं प्राकृतिक खेती का मार्ग अपनाया है, जो आज उनके लिए न केवल स्वास्थ्य का स्रोत है बल्कि वित्तीय समृद्धि का भी आधार बना है। उन्होंने कॉरपोरेट नौकरी को अलविदा कहकर खेती की दुनिया में कदम रखा और सफलता की जो मिसाल कायम की है, वह अन्य किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा का कारण बनी है।

उनका मानना है कि आधुनिक खेती के तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का इज्जत करना आवश्यक है। इसी का परिणाम है कि उनकी उपज स्वास्थ्यवर्धक और रासायनिक मुक्त होती है, जो स्थानीय बाजार के साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी अच्छी खासी डिमांड में है। सालाना आय 10 लाख रुपये तक पहुंचने के बावजूद वे किसानों को भी शिक्षित कर रहे हैं कि किस प्रकार अहिंसक और प्राकृतिक खेती से आर्थिक लाभ और पर्यावरण सुरक्षा दोनों सम्भव हैं।

त्रिपाठी की इस पहल ने न केवल उनके गांव में कृषि का स्वरूप बदला है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी प्राकृतिक खेती की विधियों को बढ़ावा मिला है। आज तमाम युवा उनकी इस कहानी से प्रेरित होकर पारंपरिक खेती को नई तकनीकों से जोड़कर अपना व्यवसाय शुरू कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “यदि हम प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर खेती करें, तो न केवल उपज बढ़ेगी बल्कि हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। मैं चाहता हूँ कि अधिक से अधिक लोग प्राकृतिक खेती की ओर आएं और अपनी आर्थिक मजबूती के साथ-साथ स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाएं।”

इस बदलाव की लहर से स्पष्ट होता है कि शहरों की चमक-दमक के पीछे छिपा जीवन नहीं सभी के लिए सुखद है। त्रिपाठी जैसे लोग यह साबित कर रहे हैं कि खेती में भी आधुनिकता के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान को मिलाकर बहुत अच्छी कमाई और स्वास्थ्य लाभ पाया जा सकता है।

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