बूंदी : दो दिन पहले जारी हुआ बजट, साढ़े चार करोड़ एक दिन में खर्च करना होगा

बूंदी, राजस्थान। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के नामांकन के आधार पर पूरे सत्र में किए जाने वाले कार्यों के लिए बजट पिछली बार समय से बहुत लेट जारी किया गया है। इस बार वित्तीय वर्ष समाप्ति की अंतिम तिथि के ठीक दो दिन पहले ही बजट जारी किया गया है, जिससे विभाग के सामने काफी बड़ी चुनौती उत्पन्न हो गई है। विभाग को इस बजट की राशि 31 मार्च तक खर्च करनी होगी, अन्यथा यह राशि सरकार के खजाने में वापस चली जाएगी।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा जारी किए गए बजट में साढ़े चार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसे एक ही दिन में खर्च करना होगा। इस स्थिति ने शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन दोनों को चौकन्ना कर दिया है। कर्मचारी और अधिकारी इस त्वरित खर्च की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करने को विवश हैं। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन तक इतने बड़े बजट की राशि खर्च करना साधारण नहीं है और इसके लिए विभाग ने अलग-अलग योजनाओं को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बजट की इस तरह की देरी से योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन प्रभावित होता है जिससे बच्चों की शिक्षा पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं विभागीय अधिकारियों ने कहा कि वे स्थिति को गंभीरता से देख रहे हैं और सभी संसाधनों का उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित करेंगे कि धनराशि का उपयोग निर्धारित अवधि में किया जाए।
एक अधिकारी ने बताया कि बजट को खर्च करने के लिए स्कूलों के सामूहिक नामांकन, शिक्षण सामग्री की खरीदारी, प्रशिक्षकों के वेतन भुगतान और अन्य जरूरी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग यह भी प्रयास कर रहा है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन में त्वरित तरीके से खर्च करने के कारण किसी भी योजना की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि बजट की देर से रिलीज के कारण कई बार आवश्यक उपकरण और सुविधाओं की खरीद में बाधा आती है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से आग्रह किया है कि भविष्य में बजट समय पर जारी किया जाए ताकि योजनाओं का सुचारू और प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
समापन में कहा जा सकता है कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा जारी बजट की राशि को 31 मार्च तक खर्च करना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन यह आवश्यक भी है ताकि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ सत्र के दौरान निर्धारित सभी योजनाएं पूरी की जा सकें। विभाग को इस दिशा में दी गई समय सीमा के भीतर बेहतर परिणाम निकालने की आवश्यकता है।




